बालोद/दल्ली राजहरा। ग्राम सांकरा स्थित कृषि भूमि से जुड़े पारिवारिक विवाद में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षक रघुनंदन गंगबोईर साहू ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों एवं हल्का पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनकी सौतेली मां एवं सौतेली बहनों के साथ कथित मिलीभगत कर बिना वैधानिक सूचना दिए विवादित भूमि की माप-जोख कर रातों-रात बुलडोजर चलाकर भूमि का स्वरूप बदल दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
रघुनंदन साहू, जो शासकीय हाई स्कूल जमरूआ में गणित के व्याख्याता हैं, ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय सोनूराम साहू सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे। उनके अनुसार, प्रथम पत्नी के निधन के बाद परिवार की सहमति से दूसरी शादी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि प्रथम पत्नी के निधन के बाद प्राप्त अनुग्रह राशि से ग्राम सांकरा में लगभग 5.50 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई, जिसमें उस समय उनके नाबालिग होने के कारण भूमि अभिलेखों में उनका तथा उनकी सौतेली मां का नाम दर्ज किया गया।
रघुनंदन का आरोप है कि वर्ष 2014 में पिता के निधन के बाद संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने बंटवारे के लिए तहसीलदार कार्यालय में आवेदन दिया, लेकिन पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई और कई महत्वपूर्ण कार्यवाहियां उनकी अनुपस्थिति में पूरी कर ली गईं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें वरिष्ठता नियमों की अनदेखी कर कनिष्ठ घोषित किया गया। वहीं उनकी पत्नी, जो अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं, को भी कथित रूप से प्रतिशोधात्मक तरीके से ऐसे विद्यालय में पदस्थ किया गया जहां पहले से अंग्रेजी शिक्षक कार्यरत थे, जिससे उन्हें अतिशेष की श्रेणी में लाया गया। उनका कहना है कि पिछले 13-14 महीनों से वे और उनकी पत्नी विभागीय प्रताड़ना झेल रहे हैं तथा उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें कार्य करने और वेतन प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रघुनंदन ने आरोप लगाया कि इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर उनकी सौतेली मां एवं बहनों ने राजस्व विभाग में एकतरफा कार्रवाई करवाई। उनका कहना है कि तहसीलदार के बंटवारा आदेश की जानकारी भी उन्हें समय पर नहीं दी गई और आदेश की प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन देने के बाद भी महीनों तक इंतजार करना पड़ा।
उन्होंने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाद में पारिवारिक सूत्रों से उन्हें जानकारी मिली कि हल्का पटवारी एवं अन्य अधिकारियों की कथित मिलीभगत से रातों-रात विवादित भूमि की माप-जोख कर बुलडोजर चलाया गया, जिससे खेत का भौतिक स्वरूप बदल गया।
रघुनंदन का कहना है कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत एवं एकपक्षीय है। उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग एवं राज्य शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच, विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने तथा दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष रघुनंदन गंगबोईर साहू द्वारा लगाए गए आरोपों और जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। मामले में राजस्व विभाग अथवा दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







