DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

सामाजिक बहिष्कार जैसी कुरीति पर बने सख्त कानून: डॉ. दिनेश मिश्र

आगामी विधानसभा सत्र में कानून बनाने की मांग, सभी विधायकों को लिखा जा रहा पत्र

रायपुर। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ प्रभावी कानून बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय को गंभीरता से उठाते हुए सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध कानून बनाया जाना चाहिए। इसके लिए प्रदेश के सभी विधायकों को पत्र लिखकर पहल करने का आग्रह किया जा रहा है।

डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रदेश में सामाजिक और जातिगत स्तर पर सक्रिय कुछ पंचायतों द्वारा सामाजिक बहिष्कार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल के वर्षों में जशपुर, कोंडागांव, केशकाल, सरायपाली तथा बगीचा-कांसाबेल क्षेत्रों में परिवारों के सामाजिक बहिष्कार के मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं, जहां जाति से बाहर विवाह करने, सामाजिक आदेश नहीं मानने या पंचायतों के निर्णयों का विरोध करने पर पूरे परिवार को समाज से अलग कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में लोगों को केवल अलग पेशा अपनाने, सूचना के अधिकार (RTI) का उपयोग करने या सामाजिक परंपराओं से अलग निर्णय लेने पर भी बहिष्कार का सामना करना पड़ा है। समिति के अनुसार प्रदेश में हजारों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी सामाजिक प्रताड़ना से प्रभावित हैं।

सामाजिक बहिष्कार से परिवारों का जीवन हो जाता है कठिन

डॉ. मिश्र ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार केवल सामाजिक दूरी नहीं बल्कि कई बार व्यक्ति के सामान्य जीवन के अधिकारों को भी प्रभावित करता है। बहिष्कृत परिवारों को सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग, सामाजिक आयोजनों में भागीदारी, सामुदायिक सहयोग और आजीविका से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर सामाजिक दबाव और दंडात्मक निर्णयों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित परिवार सामाजिक, आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों से गुजरते हैं और कई बार पलायन जैसी स्थिति भी बन जाती है।

महाराष्ट्र कानून का दिया उदाहरण

डॉ. मिश्र ने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा ने सामाजिक बहिष्कार रोकने के उद्देश्य से संबंधित कानून को वर्ष 2016 में पारित किया था और बाद में उसे लागू किया गया। उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में सामाजिक बहिष्कार से जुड़े मामलों के व्यवस्थित आंकड़े और अलग कानूनी ढांचा सीमित होने के कारण रोकथाम और कार्रवाई में कठिनाई आती है। इसलिए राज्य स्तर पर इस विषय पर व्यापक चर्चा और प्रभावी नीति की आवश्यकता है।

अंत में उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि सामाजिक सम्मान, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर गंभीर पहल की जाए।

— डॉ. दिनेश मिश्र
नेत्र विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, रायपुर

You cannot copy content of this page