टीपी दस्तावेज में कथित संशोधन और परिवहन अनुमति को लेकर जांच की मांग, ग्रामीणों व स्थानीय लोगों में चर्चा तेज
डौंडीलोहारा। डौंडीलोहारा क्षेत्र में मालिक मकबूजा सागौन लकड़ी के परिवहन से जुड़े एक कथित ट्रांजिट पास (टीपी) दस्तावेज के वायरल होने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने इस मामले में परिवहन अनुमति, दस्तावेजीय प्रक्रिया और विभागीय जांच व्यवस्था को लेकर विभिन्न सवाल सामने आ रहे हैं।
वायरल जानकारी के अनुसार एक ट्रांजिट पास में लगभग 1.911 घन मीटर सागौन लकड़ी के 14 लट्ठों के परिवहन का उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित रूप से टू-व्हीलर वाहन का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। दस्तावेज के वायरल होने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि इतनी मात्रा में लकड़ी का परिवहन व्यवहारिक और नियमों के अनुरूप कैसे संभव हुआ।
टीपी में कथित सुधार पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित दस्तावेज में बाद में सील लगाकर संशोधन किया गया, लेकिन कथित सुधार के साथ आवश्यक लघु हस्ताक्षर (इनिशियल) दर्ज नहीं किए गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित दस्तावेज की आधिकारिक जांच अथवा पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
वन विभाग की प्रक्रियाओं से परिचित लोगों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में मूल्यवान दस्तावेजों में किए जाने वाले संशोधन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं और आवश्यक प्रमाणन दर्ज किया जाता है।
मालिक मकबूजा अनुमति प्रक्रिया को लेकर भी उठी चर्चा
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि मालिक मकबूजा वृक्षों की कटाई एवं परिवहन के लिए विभिन्न स्तरों की विभागीय प्रक्रियाओं, मापन, क्रमांकन और अनुमति की आवश्यकता होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य आवेदकों को प्रक्रिया पूरी करने में लंबा समय लग सकता है, ऐसे में किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।
जांच नाकों की भूमिका पर भी उठे प्रश्न
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने परिक्षेत्र के जांच नाकों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब स्थानीय नागरिकों द्वारा यह मांग की जा रही है कि यदि वायरल दस्तावेज वास्तविक हैं तो संबंधित प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति समाप्त हो सके और यदि कोई अनियमितता हुई हो तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
(नोट: यह समाचार वायरल दावों और स्थानीय स्तर पर उठे सवालों पर आधारित है। संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।)












