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CGMSCL में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी को लेकर उठे गंभीर सवाल, टेंडर प्रक्रिया और रेट कॉन्ट्रैक्ट विस्तार की जांच की मांग

टेंडर प्रक्रिया लंबित रहने के बीच रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने का आरोप, पारदर्शिता और सरकारी हितों को लेकर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी को लेकर टेंडर प्रक्रिया और रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) के विस्तार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से देरी के बीच एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से रेट कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार विस्तार दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, CGMSCL द्वारा Tender No. 10/AYUR-Classical एवं 11/AYUR-Classical को 20 नवंबर 2025 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। आरोप है कि उक्त टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक संबंधित कंपनी के लाइसेंसर द्वारा अपने प्रभाव और पहुंच का कथित रूप से इस्तेमाल करते हुए टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा इसमें देरी कराने का प्रयास किया गया। इसी दौरान संबंधित कंपनी के 18 माह के लिए वैध रेट कॉन्ट्रैक्ट को कथित रूप से छह माह के लिए बढ़ाया गया और इस अवधि में सप्लाई जारी रखी गई।

इसके बाद 22 जून 2026 को करीब 17 माह बाद उक्त टेंडर को रद्द किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में इतनी लंबी अवधि तक देरी और उसके बाद टेंडर निरस्त किए जाने के पूरे घटनाक्रम की जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टेंडर प्रक्रिया में देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और इससे किसे लाभ हुआ।

इसी बीच CGMSCL द्वारा Tender No. 10, 11, 12 एवं 13/AYUR-Classical के नए टेंडर 22 जून 2026 को जारी किए गए, जिनमें बिड जमा करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 निर्धारित थी। शिकायत के अनुसार, अंतिम तिथि बीतने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और Cover-A भी खोला जा चुका है, बावजूद इसके रेट कॉन्ट्रैक्ट के पुनः विस्तार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आरोप लगाया गया है कि पूर्व में 18 माह की अवधि पूरी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह माह के लिए बढ़ाया गया था। अब पुनः छह माह के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाए जाने की प्रक्रिया अपनाए जाने की चर्चा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यदि टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और Cover-A खोला जा चुका है, तो नई दरों पर रेट कॉन्ट्रैक्ट जारी करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जा सकता है। ऐसे में बार-बार रेट कॉन्ट्रैक्ट विस्तार दिए जाने से पारदर्शी प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने और शासन को आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया को लंबा खींचकर किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कंपनी अथवा CGMSCL के अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि टेंडर प्रक्रिया के तहत Cover-A खोला जा चुका है, तो नई निविदा प्रक्रिया को नियमानुसार शीघ्र पूरा कर नया रेट कॉन्ट्रैक्ट जारी किया जा सकता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे सरकारी खरीदी में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा।

शिकायतकर्ताओं ने राज्य शासन से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही पिछले टेंडर को लंबे समय तक लंबित रखने, उसे निरस्त करने, पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को विस्तार देने तथा वर्तमान में पुनः रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की प्रक्रिया की जांच की जाए। जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित फर्म की भूमिका नियमविरुद्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार लगातार सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात करती है। ऐसे में सरकारी दवाओं की खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए। इससे न केवल शासन की पारदर्शिता पर विश्वास मजबूत होगा, बल्कि सरकारी धन के उचित उपयोग और प्रतिस्पर्धात्मक खरीदी की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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