बालोद, 29 जुलाई 2026। बालोद जिले में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के मामले में माननीय विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) श्रीमती श्वेता उपाध्याय गौर, बालोद ने दो आरोपियों को दोषसिद्ध ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹1-1 लाख के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपियों को 6-6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय 28 जुलाई 2026 को सुनाया गया।
प्रकरण में आरोपी सुमीत सोनी, उम्र 25 वर्ष एवं मनीष कुमार निर्मलकर, उम्र 35 वर्ष, दोनों निवासी वार्ड क्रमांक 07, टीचर कॉलोनी, राजहरा, थाना राजहरा, जिला बालोद को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की धारा 8 सहपठित धारा 22(सी) के तहत दोषी पाया गया।
मामले की पैरवी शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एनडीपीएस) घनश्याम सिंह साहू, बालोद द्वारा की गई। अभियोजन के अनुसार, 27 फरवरी 2024 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सुमीत सोनी और मनीष निर्मलकर राजहरा के टीचर कॉलोनी स्थित गार्डन के पास अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। सूचना पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए पुलिस टीम ने गवाहों के साथ मौके पर पहुंचकर दोनों आरोपियों को पकड़ा।
पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से एल्प्राजोलम एवं स्पास-ट्रानकेन प्लस सहित कुल 1756.8 ग्राम नशीली दवाएं बरामद कर जब्त की गईं। बरामद दवाओं की पहचान एवं परीक्षण के लिए औषधि निरीक्षक को मौके पर बुलाया गया तथा नियमानुसार कार्रवाई की गई।
विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में आगे की कड़ियां भी जोड़ीं। प्रकरण में मुकेश उर्फ मुक्कू निर्मलकर एवं अभिषेक उर्फ विक्की राव की भूमिका भी सामने आई। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि नशीली दवाएं चारामा के पास एक अज्ञात व्यक्ति से लाकर आरोपियों के माध्यम से बिक्री कराई जा रही थीं। मामले में पुलिस ने संबंधित आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
माननीय न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर अपराध प्रमाणित पाए जाने पर आरोपी सुमीत सोनी एवं मनीष कुमार निर्मलकर को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹1-1 लाख के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोनों आरोपियों को 6-6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इस प्रकरण की विवेचना सहायक उपनिरीक्षक सूरज साहू, उपनिरीक्षक उमा ठाकुर एवं सहायक उपनिरीक्षक कांताराम घिलेन्द्र द्वारा की गई। प्रभावी विवेचना, साक्ष्यों के संकलन और अभियोजन की मजबूत पैरवी के परिणामस्वरूप नशीली दवाओं की अवैध बिक्री से जुड़े इस मामले में आरोपियों को कठोर सजा मिली है।










