एफटीसी न्यायालय का फैसला: दुष्कर्म, धमकी और अन्य धाराओं में दोष सिद्ध, कुल विभिन्न अवधियों की सजा
बालोद। युवती से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) बालोद ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) ताजुद्दीन आसिफ द्वारा पारित निर्णय दिनांक 15 जून 2026 के अनुसार आरोपी रमेश पुरी (55 वर्ष), निवासी सम्बलपुर, थाना डौण्डीलोहारा, जिला बालोद को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के अंतर्गत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड, धारा 332(बी) के अंतर्गत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 351(3) के अंतर्गत 1 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया गया।
घर में अकेली थी युवती, शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने 16 नवंबर 2025 को थाना डौण्डीलोहारा पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि परिवार के अन्य सदस्य बाहर रहते हैं और वह घर पर अकेली थी।
शिकायत के अनुसार 15 नवंबर 2025 को दोपहर लगभग 2:30 बजे आरोपी पीछे की ओर से घर में प्रवेश कर उसे जबरन कमरे तक ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने और आवाज लगाने पर आरोपी ने उसे धमकी भी दी।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर थाना डौण्डीलोहारा में अपराध क्रमांक 148/2025 दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में पेश हुआ अभियोग पत्र
मामले की विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलित कर 19 दिसंबर 2025 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण की पैरवी अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने की। मामले की सम्पूर्ण विवेचना सहायक उपनिरीक्षक अनित राम यादव द्वारा की गई।
प्रबल साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुनाया फैसला
न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। न्यायालय के निर्णय को महिलाओं की सुरक्षा और अपराध के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।










