मुड़पार बना सामुदायिक वन प्रबंधन का प्रेरक मॉडल, श्रमदान से तैयार हुई नर्सरी
डौंडी लोहारा/बालोद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकासखंड डौंडी लोहारा के ग्राम मुड़पार में ग्राम सभा सदस्यों ने सामूहिक श्रमदान कर सामुदायिक नर्सरी का निर्माण किया। पर्यावरण संरक्षण और वन संवर्धन की दिशा में यह पहल ग्रामीणों की जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।
ग्राम सभा द्वारा पिछले तीन वर्षों से लगातार सामुदायिक नर्सरी तैयार की जा रही है। नर्सरी में स्थानीय जंगलों से संग्रहित बीजों का उपयोग किया जाता है तथा इसे पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय व्यवस्थाओं के अनुरूप संचालित किया जाता है। ग्रामीणों का उद्देश्य स्थानीय प्रजातियों के पौधों का संरक्षण, जैव विविधता का संवर्धन और वन क्षेत्र का पुनर्जीवन करना है।
सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के बाद बदली गांव की पहचान

कभी सड़क निर्माण की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार जैसे मुद्दों के कारण चर्चा में रहा ग्राम मुड़पार आज सामुदायिक वन संसाधन (CFR) प्रबंधन के सफल मॉडल के रूप में नई पहचान बना रहा है। ग्राम सभा को 9 अगस्त 2023 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र प्राप्त हुआ था। इसके बाद से ग्रामीण अपने पारंपरिक वन क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन में लगातार जुटे हुए हैं।
बिना सरकारी सहायता के हो रहा बड़ा काम

विशेष बात यह है कि ग्राम सभा द्वारा किए जा रहे सभी कार्य किसी सरकारी अनुदान या बाहरी वित्तीय सहायता के बिना केवल श्रमदान और जनसहभागिता के आधार पर किए जा रहे हैं। गांव के महिला और पुरुष सदस्य जंगलों से बीज संग्रहण, सीड बॉल निर्माण, नर्सरी तैयार करने तथा ठेंगा पाली जैसी पारंपरिक वन संरक्षण व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत
ग्रामीणों का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी है। सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से गांव में हरियाली बढ़ाने और स्थानीय वन संपदा को संरक्षित करने का अभियान निरंतर जारी है।

कार्यक्रम में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सियाराम वट्टी, सचिव मोहनलाल सलाम, सहयोगी संस्था खोज एवं जनजाति समिति के कार्यकर्ता तथा ग्राम सभा के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
ग्राम मुड़पार का यह प्रयास सामुदायिक सहभागिता, पारंपरिक ज्ञान और वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जिससे अन्य ग्राम सभाएं भी सीख ले सकती हैं। 🌱🌳
