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जंगल बचाने ग्रामीणों ने उठाया अनोखा कदम: कुदारी में बनी सामुदायिक नर्सरी, महिलाओं ने संभाली हरियाली की कमान

विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति संरक्षण का प्रेरक उदाहरण, श्रमदान से तैयार की गई नर्सरी

डौंडीलोहारा/बालोद। जब पूरी दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मना रही थी, तब बालोद जिले के विकासखंड डौंडीलोहारा के छोटे से ग्राम कुदारी के ग्रामीण पर्यावरण संरक्षण को धरातल पर उतारने में जुटे हुए थे। गांव के लोगों ने केवल पौधारोपण तक सीमित न रहकर अपने जंगल के भीतर सामुदायिक नर्सरी तैयार कर प्रकृति संरक्षण की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।

ग्राम कुदारी के ग्रामीणों ने पारंपरिक और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए जंगल क्षेत्र में घेरा लगाकर सामुदायिक नर्सरी की स्थापना की। इस नर्सरी का उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली की अमूल्य विरासत तैयार करना है।

सबसे खास बात यह रही कि इस अभियान में ग्रामीणों ने किसी सरकारी सहायता का इंतजार नहीं किया। गांव के लोगों ने स्वयं श्रमदान कर नर्सरी तैयार की और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ली। इससे यह संदेश गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।

महिलाओं ने संभाली हरित अभियान की कमान

इस पूरे अभियान में महिलाओं की भूमिका सबसे अधिक प्रेरणादायक रही। गांव की महिलाओं ने नर्सरी निर्माण से लेकर पौधों की सुरक्षा और देखरेख तक हर कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने साबित कर दिया कि जब महिलाएं किसी सकारात्मक अभियान से जुड़ती हैं तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि जंगल और प्रकृति ही उनके जीवन का आधार हैं। इसलिए उनका संरक्षण करना केवल कर्तव्य ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी भी है।

स्थानीय पौधों के संरक्षण पर विशेष जोर

कुदारी के ग्रामीणों ने बाहरी प्रजातियों के बजाय स्थानीय पौधों को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि स्थानीय पौधे क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होते हैं तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

नर्सरी में तैयार होने वाले पौधों का उपयोग आने वाले समय में गांव और आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण के लिए किया जाएगा। इससे हरित क्षेत्र का विस्तार होगा और प्राकृतिक संसाधनों को मजबूती मिलेगी।

पूरे क्षेत्र के लिए बनी प्रेरणा

आज जब बढ़ते तापमान, जल संकट और पर्यावरण प्रदूषण जैसी चुनौतियां सामने हैं, ऐसे समय में ग्राम कुदारी की यह पहल आशा की नई किरण बनकर उभरी है। ग्रामीणों ने दिखा दिया है कि यदि समाज एकजुट होकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प ले, तो बड़े बदलाव संभव हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्राम कुदारी से निकला यह संदेश स्पष्ट है कि पर्यावरण बचाने के लिए केवल भाषण नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी और जमीनी प्रयास जरूरी हैं। ग्रामीणों की यह सामुदायिक नर्सरी आने वाले वर्षों में हजारों पौधों को जन्म देगी और पर्यावरण संरक्षण की इस प्रेरक कहानी को और भी मजबूत बनाएगी।

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