बालोद। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और सही अवसर मिल जाए, तो अभाव भी रास्ता नहीं रोक पाते। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है ग्राम सिरपुर की नन्हीं भाविका राणा की, जिसका चयन ‘शिक्षा का अधिकार (RTE)’ के तहत हुआ है। यह सिर्फ एक स्कूल में दाखिला नहीं, बल्कि पूरे परिवार के उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत है।
🎓 गरीबी के बीच खिला सफलता का फूल
भाविका एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती है। परिवार में 6 सदस्य हैं और आजीविका का मुख्य आधार उसके पिता नरेश कुमार राणा की मेहनत है, जो किसानी और मिस्त्री का काम कर परिवार चलाते हैं। मात्र 1.50 एकड़ जमीन में खेती कर घर चलाना आसान नहीं था, ऐसे में भाविका की यह सफलता पूरे परिवार के लिए बड़ी खुशखबरी बनकर आई।
😊 चयन की खबर से घर में जश्न का माहौल

जैसे ही भाविका के चयन की खबर घर पहुंची, पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। भाविका उत्साह से कहती है—
“अब मैं डौंडीलोहारा पढ़ने जाऊंगी।”
उसकी आंखों में दिख रही चमक उसके सपनों की उड़ान को साफ बयां करती है।
👨👩👧 माता-पिता का सपना हुआ साकार
माता चित्रलेखा राणा और पिता नरेश कुमार राणा का सपना था कि उनकी बेटी भी शहर के बेहतर माहौल में पढ़ाई करे।
उन्होंने कहा—
“हम चाहते थे कि हमारी बेटी भी गांव की सीमाओं से बाहर निकलकर आगे बढ़े, अब RTE के माध्यम से उसे बेहतर अवसर मिलेगा।”
🏠 सरकारी योजनाओं से मिली नई ताकत
भाविका के परिवार को अन्य योजनाओं का भी लाभ मिला है—
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर
- महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहायता
इन योजनाओं ने परिवार को आर्थिक और सामाजिक मजबूती प्रदान की है, जिससे अब भाविका की पढ़ाई में भी सहूलियत होगी।
🙏 सरकार के प्रति जताया आभार
भाविका के पिता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा—
“सरकारी योजनाओं ने हमारे जैसे गरीब परिवारों की जिंदगी आसान बना दी है। अब हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित नजर आता है।”
🌟 प्रेरणा बनी भाविका की कहानी
भाविका की यह कहानी बताती है कि सही नीति और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें साकार कर सकते हैं।
यह सफलता न सिर्फ एक परिवार की खुशी है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
