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“शराब दुकान हटाओ, गांव बचाओ”: बघमरा बाईपास में शिफ्टिंग के विरोध में उतरी कांग्रेस

तांदुला डैम से हटाकर ग्रामीण क्षेत्र में दुकान खोलने के प्रस्ताव पर उठे सवाल, अंचल प्रकाश साहू ने कहा— कम बिक्री है तो दुकान बंद करें

बालोद। तांदुला डैम के नीचे संचालित शराब दुकान को बघमरा बाईपास क्षेत्र में स्थानांतरित किए जाने की चर्चा के बीच विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अंचल प्रकाश साहू ने प्रस्तावित विस्थापन का विरोध करते हुए कहा है कि यदि दुकान में बिक्री कम हो रही है तो उसे किसी ग्रामीण क्षेत्र में स्थानांतरित करने के बजाय स्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए।

तांदुला डैम क्षेत्र में पहले से हो रहा था विरोध

अंचल प्रकाश साहू ने कहा कि तांदुला डैम के नीचे स्थित शराब दुकान का स्थानीय नागरिक लंबे समय से विरोध कर रहे थे। उनका मानना है कि पर्यटन स्थल के समीप शराब दुकान होने से पर्यावरण और सामाजिक माहौल दोनों प्रभावित होते हैं। तांदुला डैम घूमने आने वाले परिवारों और पर्यटकों को भी इससे असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।

बघमरा बाईपास में शिफ्टिंग का ग्रामीणों ने किया विरोध

साहू ने बताया कि अब शराब दुकान को बघमरा बाईपास क्षेत्र में स्थानांतरित करने की बात सामने आ रही है, जिसका पांच गांवों के ग्रामीणों तथा नयापारा क्षेत्र के निवासियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता की भावनाओं की अनदेखी कर शराब दुकान को गांवों के समीप स्थापित करना उचित नहीं होगा।

स्कूल बंद हो सकते हैं तो शराब दुकान क्यों नहीं?

कांग्रेस अध्यक्ष ने शासन के उस तर्क पर सवाल उठाया जिसमें कम बिक्री को दुकान स्थानांतरण का कारण बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र संख्या कम होने पर स्कूलों का युक्तियुक्तिकरण कर उन्हें बंद किया जा सकता है, तो कम बिक्री वाली शराब दुकानों को बंद करने पर विचार क्यों नहीं किया जाता।

उन्होंने कहा कि बालोद जैसे छोटे शहर में एक कंपोजिट शराब दुकान पर्याप्त है। सरकार यदि वास्तव में कम बिक्री वाली दुकानों के संचालन को घाटे का सौदा मानती है, तो उन्हें बंद कर जनहित में सकारात्मक संदेश दे सकती है।

जनभावनाओं का सम्मान करने की मांग

कांग्रेस शहर अध्यक्ष ने शासन से मांग की है कि तांदुला डैम क्षेत्र की शराब दुकान को बघमरा बाईपास अथवा किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में स्थानांतरित करने के बजाय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उसे स्थायी रूप से बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि गांवों में शराब दुकान खोलने से सामाजिक वातावरण प्रभावित होगा और ग्रामीणों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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