फाल्गुन का मधुर संदेश है आया,
अपने संग नव उल्लास लाया।
रंग-बिरंगे सपनों की बौछार,
भर दे जीवन में खुशियाँ अपार।
राग-द्वेष की दीवार गिराएँ,
भेदभाव सब दूर भगाएँ।
प्रेम के रंग में मन रंग जाए,
हर आँगन हँसता गुनगुनाए।
पिचकारी से छूटे स्नेह की धार,
मिठास घुले हर दिल में बार-बार।
ऐसी हो सबकी यह होली,
खुशियों से सजी रहे हर टोली।
ढोलक की थाप बजे चौबारे,
हँसी बिखरे गलियों के किनारे।
अबीर-गुलाल उड़े जब प्यारा,
रंग जाए मन सारा का सारा।
मीठे पकवानों की खुशबू छाए,
हर चेहरा मुस्कान से जगमगाए।
मिल-जुलकर सब प्रेम बढ़ाएँ,
नए सपनों की राह सजाएँ।
प्रकृति भी रंगों में नहाई,
धरती ने हरियाली ओढ़ी नई।
ऐसी पावन हो यह बहार,
सुख-समृद्धि दे हर बार।
संदेश
समय रहते अपनों संग हर खुशी मनाएँ, क्योंकि रंग कब फीके पड़ जाएँ, कोई जान न पाए।
स्वरचित
प्रतिभा सुधीर त्रिपाठी
शिक्षक
