आत्मज्ञान भवन में मनाया गया होली मिलन समारोह, प्रेम और क्षमा का दिया संदेश



बालोद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आत्मज्ञान भवन, आमापारा बालोद में सोमवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बी.के. भाई-बहन उपस्थित रहे और आपसी प्रेम, सद्भाव तथा आध्यात्मिक संदेशों के साथ होली का पर्व मनाया गया।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज की मुख्य संचालिका बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने सभी को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने होली के आध्यात्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि ‘हो-ली’ का अर्थ है – जो हो गया, उसे जाने देना। अक्सर मनुष्य पुरानी बातों, दुखों और कड़वी यादों को पकड़कर बैठा रहता है, जिससे उसका वर्तमान बोझिल हो जाता है। परमात्मा हमें संदेश देते हैं कि जो बीत गया उसे भूल जाना ही सच्ची होली है।

उन्होंने कहा कि होली का पर्व प्रेम और क्षमा का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह दर्शाता है कि मनुष्य का मूल स्वभाव नफरत नहीं बल्कि प्रेम है। परमात्मा का सबसे प्रिय गुण प्रेम है। ‘लव इज गॉड और गॉड इज लव’ का संदेश भी इसी भावना को दर्शाता है।

बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि होलिका दहन का वास्तविक अर्थ केवल लकड़ियों को जलाना नहीं बल्कि अपने भीतर के क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या को ज्ञान की अग्नि में भस्म करना है। जब हम अपनी कमियों को त्याग देते हैं और क्षमा का भाव अपनाते हैं, तब जीवन में सच्ची शांति और खुशी का अनुभव होता है।

उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि इस बार की होली केवल रंग और पानी तक सीमित न रखें, बल्कि मन की सफाई, मधुर वाणी और क्षमा के भाव के साथ मनाएं। जब हम प्रेम के गुलाल से सबको अपनाते हैं और क्षमा की फुहार से कड़वाहट को धो देते हैं, तब हमारा जीवन भी एक उत्सव बन जाता है।

कार्यक्रम के दौरान छोटी-छोटी बहनों द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया तथा भाईयों द्वारा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। समारोह का समापन आपसी मिलन और शुभकामनाओं के साथ हुआ।

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