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मजदूर माता-पिता की चार बेटियों ने रचा इतिहास: भेंगारी की कामिनी नेताम Indo-Tibetan Border Police में चयनित, गांव में हुआ भव्य स्वागत

बालोद। ग्राम पंचायत पिरिद के आश्रित ग्राम भेंगारी की चार बेटियों ने यह साबित कर दिया कि हौसला, परिश्रम और माता-पिता का आशीर्वाद हो तो कोई भी सपना साकार हो सकता है। एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की चारों बेटियों ने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में सफलता हासिल कर गांव व जिले का नाम रोशन किया है।

कामिनी नेताम (उर्फ रानी), उम्र 24 वर्ष, पिता विष्णु नेताम (पूर्व उपसरपंच) एवं माता लीला बाई नेताम की सुपुत्री हैं। स्नातक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन आईटीबीपी में हुआ है। उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई है।

परिवार की बड़ी बेटी नंदिनी नेताम बालोद स्थित बीएमओ कार्यालय में जूनियर सेक्रेटेरियल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। कविता नेताम पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब कर रही हैं, जबकि मोनिका नेताम जिला अस्पताल बालोद में सपोर्ट स्टाफ के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

माता-पिता ने मजदूरी कर अपनी चारों बेटियों को शिक्षित किया और कभी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया। उन्होंने बेटियों को ही बेटों का दर्जा देकर आगे बढ़ाया। आज उनकी मेहनत रंग लाई है और चारों बेटियां अपने-अपने क्षेत्र में सफलता की मिसाल बन गई हैं।

गांव में हुआ ऐतिहासिक स्वागत

जब कामिनी नेताम प्रशिक्षण पूर्ण कर गांव लौटीं, तो पूरे भेंगारी में उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्रामीणों ने गांव के बाहर से ढोल-नगाड़ों और देशभक्ति के नारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। पूरा गांव देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

ग्राम पंचायत पिरिद की प्रथम महिला सरपंच रूपोतिन रमेश साहू ने कामिनी नेताम को शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पंचायत का प्रयास है कि गांव के होनहार युवाओं को मंच देकर सम्मानित किया जाए, ताकि अन्य युवा भी प्रेरणा लेकर देश सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ें।

सरपंच प्रतिनिधि रमेश कुमार साहू ने मंच से घोषणा की कि जिस प्रकार पूर्व में ग्राम पंचायत पिरिद के 14 जवानों को विभिन्न क्षेत्रों में देश सेवा हेतु सम्मानित किया गया था, उसी तरह भेंगारी ग्राम के अन्य सेवा दे रहे जवानों को भी मंच से सम्मानित किया जाएगा।

इस अवसर पर उपसरपंच नारायण देशमुख, जयधर डाकुर, नंदू देशमुख, शिव नेताम, मकुंद देशमुख, पंच दिनेश्वरी देशमुख, आशा यादव, बुधर डाकुर, रामाधार, तामेश्वर नायक, बेनू डाकुर, सुखीत डाकुर सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

भेंगारी की इन चार बेटियों की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है और यह संदेश दे रही है कि सपनों की उड़ान के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि संकल्प महत्वपूर्ण होता है।

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