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डड़सेना कलार समाज ने मनाई बहादुर कलारिन जयंती, याद किया बहादुर कलारिन की शौर्य और साहस को, पढ़िये उनकी कहानी

कुरदी/बालोद । ग्राम घीना में सिन्हा डड़सेना कलार समाज के द्वारा माता बहादुर कलारीन जयंती मनाई गई। समाज द्वारा पहले माता बहादुर कलारिन की शोभा यात्रा निकाली गई। जिसके बाद अतिथियों का स्वागत सत्कार किया गया। मंचीय आयोजन में जय मां सरस्वती पंडवानी पार्टी पैरी बालोद की प्रस्तुति हुई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरपंच बिन्दु तारम थे।

अध्यक्षता उपसरपंच डालचंद जैन ने की। विशेष अतिथि ग्राम पटेल सुखी राम पटेल व समस्त समाज ग्राम प्रमुख रहे। इस कार्यक्रम में कलार समाज के ग्राम प्रमुख चतुर सिन्हा पूर्व मंडलेश्वर, गजानंद डड़सेना, सचिव, कालू राम सिन्हा पूर्व ग्राम प्रमुख, अलख सिन्हा, माता बहादुर कलारीन सेवक  डोमार सिन्हा, उपग्राम प्रमुख  खम्हन लाल सिन्हा एवम समस्त कलार समाज के लोगों की उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान समाज ने माता बहादुर कलारिन के शौर्य और साहस को याद किया ।समाज के लोगों ने बताया कि बहादुर कलारिन की एक माची अपने बालोद जिले के ग्राम चिरचारी में ही स्थित है। माची को प्रशासनिक भाषा में स्मारक कहा जाता है।

जिसे पुरातत्व विभाग ने भी अपने संरक्षण में लिया है। दरअसल में बहादुर कलारिन का असली नाम कलावती भी था। उन्होंने कई बुरे लोगों के छक्के छुड़ाए। जिसके बाद उनका नाम बहादुर कलारिन पड़ गया। नारी सम्मान और त्याग के लिए बहादुर कलारिन जानी जाती है।

जिन्होंने संसार के हित के लिए अपने बच्चे को ही मारा था। फिर खुद कुएं में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। मां बहादुर कलारिन सिन्हा समाज के आराध्य देवी है। आज भी कई मंचों पर इस वीरांगना के साहस और त्याग की अभिव्यक्ति जनमानस में होती है।

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