बालोद | बालोद जिले के सांकरा स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार को आयोजित विदाई एवं सम्मान समारोह ने शिक्षा जगत के लिए एक अविस्मरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर वर्षों तक व्याख्याता के रूप में सेवाएं देने वाले घनाराम देशमुख को उनके शिष्य रामा देशमुख ने करीब 70 किलो बूंदी के लड्डुओं से तौलकर सम्मानित किया।

रामा देशमुख ने लगभग छह महीने पहले घोषणा की थी कि यदि उनके प्रिय गुरु प्राचार्य बनेंगे, तो वे उन्हें लड्डुओं से तौलकर सम्मानित करेंगे। जैसे ही घनाराम देशमुख के प्राचार्य पद पर पदोन्नति की सूचना मिली, रामा ने अपनी इस घोषणा को साकार करने की तैयारी शुरू कर दी।
20 साल बाद भी कायम रहा गुरु–शिष्य का अटूट रिश्ता
रामा देशमुख वर्ष 2004 से 2007 बैच के छात्र हैं। घनाराम देशमुख ने न केवल रामा, बल्कि उनके दोनों बड़े भाइयों संतोष और योगेश्वर देशमुख को भी पढ़ाया था। पढ़ाई समाप्त होने के बाद भी रामा ने गुरुजी से संबंध बनाए रखा और समय-समय पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
सम्मान समारोह बना ऐतिहासिक पल
समारोह के दौरान रामा ने मंच पर अपने गुरु को आमंत्रित कर 70 किलो लड्डुओं से तौलकर उनका अभिनंदन किया। यह दृश्य उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।
प्राचार्य घनाराम देशमुख बोले – यही है सच्ची दक्षिणा
सम्मान से अभिभूत प्राचार्य घनाराम देशमुख ने कहा,
“एक गुरु के लिए इससे बड़ी कोई दक्षिणा नहीं कि उनके पढ़ाए हुए छात्र जीवन में उन्हें सम्मान और आदर के साथ याद रखें। रामा देशमुख का यह व्यवहार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। शिक्षक जीवन में सैकड़ों बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन वर्षों बाद भी कोई शिष्य इसी श्रद्धा के साथ सामने आता है, तो वह पल अमूल्य बन जाता है।”
सेवा का लंबा सफर: 1998 से 2025 तक सांकरा स्कूल में योगदान
घनाराम देशमुख ने 1998 से 2025 तक सांकरा हायर सेकेंडरी स्कूल में सेवाएं दीं। पदोन्नति के बाद वे वर्तमान में खरथूली हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं।
पहले भी कर चुके हैं अनूठी पहल
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि रामा देशमुख इससे पहले भी ऐसे अनूठे सम्मान की पहल कर चुके हैं। पिछले वर्ष प्राचार्य कौमार्य के सेवानिवृत्ति अवसर पर उन्हें नारियल से तौलकर सम्मानित किया गया था।
दोहरी खुशी का अवसर और समाज के लिए प्रेरणा
शनिवार के कार्यक्रम में वर्तमान पदस्थ प्राचार्य एन.के. गौतम को भी प्राचार्य पद पर पदोन्नति पर सम्मानित किया गया। वहीं घनाराम देशमुख को व्याख्याता से प्राचार्य बनने पर ससम्मान विदाई दी गई। यह आयोजन गुरु–शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बनकर समाज और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत साबित हुआ।
