मानसिक रूप से असहाय युवती से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास

विशेष न्यायालय बालोद का सख्त फैसला, एट्रोसिटी एक्ट के तहत दोष सिद्ध

बालोद। मानसिक रूप से असहाय युवती के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशेष न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। माननीय श्री एस.एल. नवरत्न, प्रधान विशेष/सत्र न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम), बालोद की अदालत ने यह निर्णय सुनाया।
न्यायालय द्वारा आरोपी डामन यादव, पिता आनंद राम यादव, उम्र 47 वर्ष, निवासी ठेकवाडीह, थाना गुरूर, जिला बालोद (छ.ग.) को
भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(झ) के अंतर्गत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 200 रुपये अर्थदंड, धारा 64(2)(ट) के अंतर्गत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 200 रुपये अर्थदंड,
तथा अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(2)(v) के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। घटना का संक्षिप्त विवरण
प्रकरण के अनुसार, पीड़िता की बहन द्वारा थाना गुरूर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि उसकी बहन पिछले कई वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ है तथा अक्सर बिना बताए गांव में इधर-उधर भटकती रहती थी। दिनांक 04 अगस्त 2024 को गांव में यह जानकारी सामने आई कि आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ खेत के पास आपराधिक कृत्य किया गया। परिजनों द्वारा पीड़िता को घर लाकर पूछताछ किए जाने पर उसने इशारों के माध्यम से घटना की पुष्टि की। मामले में गांव के कुछ लोगों द्वारा घटना देखे जाने की जानकारी भी सामने आई।

पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया

पीड़िता की शिकायत पर थाना गुरूर में अपराध क्रमांक 147/2024 के तहत संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान के आधार पर आरोप सिद्ध पाए गए।
प्रकरण की विवेचना अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्री राजेश बागड़ एवं निरीक्षक तुलसिंग द्वारा की गई, जबकि शासन की ओर से प्रभावी पैरवी विशेष लोक अभियोजक (एट्रोसिटी) श्री पुष्पदेव साहू द्वारा की गई। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि मानसिक रूप से असहाय पीड़िता के साथ किया गया अपराध अत्यंत गंभीर एवं समाज के लिए घातक है, ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।

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