बालोद। जिले के ग्राम सोरर में आयोजित सरहरगढ़ कलार महोत्सव इस वर्ष समाजसेवा, संस्कार और त्याग की भावना का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। महोत्सव के दौरान एक अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब देखने को मिला, जब क्षेत्रीय विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने समाजसेवी राजेश कुमार सिन्हा की माता मनभा बाई सिन्हा के चरण स्पर्श कर उन्हें मंच पर सम्मानित किया।
यह सम्मान केवल एक माँ का नहीं, बल्कि उस परवरिश और संस्कार का प्रतीक था, जिसने एक बेटे को समाज और पर्यावरण के लिए समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा दी। समाजसेवी राजेश कुमार सिन्हा विगत कई वर्षों से ग्राम सोरर (सिर्रा भांठा क्षेत्र) से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में मुंबई में निवासरत हैं। महानगर में रहकर भी उनका अपने गांव और बालोद जिले से गहरा भावनात्मक लगाव बना हुआ है।
राजेश कुमार सिन्हा द्वारा बालोद जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में लगातार सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से वे जिले के विभिन्न गांवों में सामाजिक आयोजनों हेतु 200 स्टील थाली–गिलास के सेट निःशुल्क उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि प्लास्टिक के उपयोग को रोका जा सके। अब तक 45 से अधिक गांवों में यह पहल सफलतापूर्वक पहुंच चुकी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वे जरूरतमंद परिवारों की सहायता, गांव के विकास कार्यों में आर्थिक योगदान, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक सरोकारों में भी लगातार सहयोग करते आ रहे हैं। मुंबई में रहने के बावजूद वे समय-समय पर गांव आकर स्थानीय समस्याओं को समझते हैं और समाधान के प्रयास करते हैं। साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को समाजसेवा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देते रहते हैं।
सरहरगढ़ महोत्सव में उनकी इन्हीं सेवाओं को देखते हुए उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। हालांकि मुंबई में होने के कारण वे स्वयं उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उनकी ओर से उनकी माता मनभा बाई सिन्हा आयोजन में शामिल हुईं। मंच पर उनका सम्मान पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण बन गया।
महोत्सव की एक और विशेष बात यह रही कि समाजसेवी राजेश कुमार सिन्हा द्वारा अपनी ओर से भोजनालय हेतु किराना सामग्री का दान किया गया, जिससे महोत्सव में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं और आगंतुकों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
उल्लेखनीय है कि ग्राम सोरर में स्थित माता बहादुर कलारिन की मांची पूरे छत्तीसगढ़ में आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। माता बहादुर कलारिन ने महिलाओं के सम्मान और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने के साथ स्वयं भी अपने जीवन का त्याग कर समाज को अमर संदेश दिया था। उनकी स्मृति में हर वर्ष कलार सिन्हा समाज द्वारा सरहरगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा माता बहादुर कलारिन के नाम से अलंकरण सम्मान भी प्रदान किया जाता है।
सरहरगढ़ महोत्सव में समाजसेवी राजेश कुमार सिन्हा के कार्यों को मिला यह सम्मान यह सिद्ध करता है कि सच्ची समाजसेवा निरंतर कर्म, निष्ठा और समर्पण से समाज में अपनी पहचान बनाती है।
बेटे की समाजसेवा का सम्मान बनी माँ, सरहरगढ़ कलार महोत्सव में भावुक क्षण
