बालोद। नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में पॉक्सो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो) बालोद कृष्ण कुमार सूर्यवंशी द्वारा सुनाया गया।
आरोपी दोषी करार, पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 में सजा
न्यायालय ने आरोपी जागेश्वर मंडावी, पिता दुखुराम मंडावी, उम्र 21 वर्ष, निवासी नेवारीखुर्द, थाना व जिला बालोद (छत्तीसगढ़) को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म, कई बार बनाया शिकार
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) बसंत कुमार देशमुख के अनुसार, वर्ष 2023 में आरोपी ने एक नाबालिग पीड़िता से बातचीत के दौरान प्रेम का नाटक किया और शादी करने का झांसा देकर उसे अपने घर बुलाया। नवंबर 2023 में आरोपी ने पहली बार पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके बाद लगातार कई बार दुष्कर्म किया गया।
गर्भवती होने पर आरोपी ने झाड़ा पल्ला, पीड़िता को अकेला छोड़ा
जनवरी 2024 में जब पीड़िता का मासिक धर्म बंद हुआ और उसने आरोपी को इसकी जानकारी दी, तो आरोपी ने उसे डॉक्टर से जांच कराने की बात कहकर टाल दिया। अस्पताल बंद होने और बाद में रक्तस्राव होने के बावजूद पीड़िता को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हो पाया।
प्रसव पीड़ा में निकला बच्चा, आरोपी ने दिखाई अमानवीयता
दिनांक 09 अगस्त 2024 की रात लगभग 3–4 बजे, पेट दर्द होने पर पीड़िता बाथरूम जा रही थी, तभी उसका बच्चा बाहर आ गया। भय और असहाय स्थिति में पीड़िता ने किसी को बताए बिना नवजात को घर के पीछे पार (गड्ढे) में डाल दिया। जब उसने यह बात आरोपी को बताई तो आरोपी ने “तुम जानो” कहकर पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया।
माता-पिता को बताई आपबीती, थाने में दर्ज हुआ मामला
घटना से व्यथित पीड़िता ने अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई, जिसके बाद 10 अगस्त 2024 को थाना बालोद में आरोपी के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ अपराध, मजबूत विवेचना
पीड़िता की शिकायत पर थाना बालोद में अपराध क्रमांक 424/2024 दर्ज किया गया। आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4, 5(ज)(2) एवं 6 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक कमला यादव द्वारा की गई। संपूर्ण विवेचना के पश्चात 08 अक्टूबर 2024 को माननीय न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय का सख्त संदेश:
नाबालिगों पर अपराध बर्दाश्त नहीं
पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला समाज के लिए स्पष्ट संदेश है कि नाबालिगों के साथ यौन अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून ऐसे अपराधियों के विरुद्ध पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा।
