करहीभदर कबीर आश्रम में मानवता की अनुपम मिसाल बना वार्षिक संत सम्मेलन, देहदान–नेत्रदान संकल्प लेने वाले 30 दाताओं का हुआ गरिमामय सम्मान



बालोद। बालोद जिले के कबीर आश्रम करहीभदर में 24 एवं 25 जनवरी 2026 को आयोजित वार्षिक कबीर संत सम्मेलन इस वर्ष आध्यात्मिकता के साथ-साथ मानव सेवा, सामाजिक चेतना और परोपकार का सशक्त संदेश लेकर सामने आया। दो दिवसीय इस आयोजन का समापन 25 जनवरी 2026 को देहदान एवं नेत्रदान का संकल्प लेने वाले दाताओं और उनके परिजनों के सम्मान समारोह के साथ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को गहरी प्रेरणा दी।

देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संत महात्मा

सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे संत महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कबीर आश्रम सूरत (गुजरात) से पधारे संत गुरुभूषण साहेब एवं संत हिरेंद्र साहेब (प्रयागराज) ने अपने प्रवचनों से मानवता, समानता और सेवा का संदेश दिया। वहीं कबीर आश्रम संकरी, महासमुंद से पधारे संत अनिल साहेब अपनी संत मंडली के साथ सम्मेलन में शामिल हुए। संतों के प्रवचनों से पूरा वातावरण सत्संगमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।

देह नश्वर, सेवा अमर—संतों का प्रेरक संदेश

संतों ने अपने उद्बोधनों में कहा कि देह नश्वर है, लेकिन सेवा अमर होती है। देहदान और नेत्रदान जैसे संकल्प मानव जीवन का सर्वोच्च दान हैं। कबीर साहेब के दोहों के माध्यम से संतों ने यह संदेश दिया कि यदि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला लाया जा सके, तो उससे बड़ा पुण्य कोई नहीं हो सकता।

30 दाताओं एवं परिजनों का मंच से सम्मान

सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित सम्मान समारोह में देहदान एवं नेत्रदान का संकल्प लेने वाले कुल 30 दाताओं को मंच से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 5 परिजनों—बसंती बाई, देवसिंह सोनबेर, विनयभूषण, अंजोर दास एवं साध्वी अंजनी के परिजनों—को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया, जिन्होंने अपने प्रियजनों के इस महान निर्णय में उनका साथ दिया। कार्यक्रम के दौरान 10 नए संकल्प पत्र भी भरे गए, जो इस अभियान की निरंतरता और सफलता को दर्शाते हैं।

अनेक गांवों से जुड़े समाजसेवी दाताओं की सहभागिता

सम्मानित दाताओं में दुपचेरा, मोखा, टेंगना, झलमला, भानपुरी, इरागुड़ा, कलंगपुर, सेमरा, सोहतरा सहित अनेक गांवों के लोग शामिल रहे। जामुन बाई, बसंती बाई, गुरुसुख साहेब (दुपचेरा), बिंदा बाई, रोमलाल, हुबलाल (मोखा), त्रिलोचन साहू, ओमेश्वरी साहू, पदमा बाई, भेखराम साहू, टीकाराम, सृष्टि साहू, प्राची साहू, नंदलाल साहू, मानबाई चौधरी, चेतनलाल चौधरी, भेवेन्द्र कुमार साहू, उमा साहू, फगनी बाई साहू, छविलाल, गुणेश्वरी साहू, पार्वती साहू, ललित कुमार साहू सहित अन्य दाताओं ने समाज के लिए यह महान संकल्प लिया।

अतिथियों की उपस्थिति और आश्रम विकास की घोषणा

कार्यक्रम में गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के भूतपूर्व विधायक वीरेंद्र साहू, जिला पंचायत सदस्य टोमन साहू एवं टोमन साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा और सामाजिक उद्देश्य की सराहना करते हुए कबीर आश्रम करहीभदर के विकास हेतु शेड निर्माण में सहयोग की घोषणा की।

ग्राम करहीभदर की सक्रिय भागीदारी

सम्मेलन में ग्राम करहीभदर के हेमंत अट्टनागर, गणेश साहू, हेमंत साहू, देवेंद्र सहारे, चित्रसेन साहू, सरपंच बसंत तारम, लीलाराम डडसेना, दीपा साहू, दयानंद साहू, दीनदयाल साहू, दिनेश सिन्हा एवं धर्मेंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी की गरिमामयी उपस्थिति में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

नेत्रदान और देहदान का सामाजिक महत्व

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि नेत्रदान से नेत्रहीनों को दृष्टि मिलती है, जबकि देहदान से चिकित्सा शिक्षा एवं शोध को बल मिलता है। यह समाज के लिए दीर्घकालीन सेवा है, जिसे अपनाने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है।

भजन, सत्संग और विचार गोष्ठियों का आयोजन

दो दिवसीय संत सम्मेलन के दौरान भजन, सत्संग, प्रवचन एवं विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। आयोजन कबीर आश्रम करहीभदर, क्षेत्रीय भक्त मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। आयोजन को सफल बनाने में सेवादारों, युवाओं और ग्रामीणों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

आध्यात्मिकता से सामाजिक परिवर्तन का संदेश

यह वार्षिक संत सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सिद्ध कर गया कि जब आध्यात्मिकता सामाजिक सरोकारों से जुड़ती है, तब समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन संभव होता है। देहदान और नेत्रदान की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।इस पूरे आयोजन में देवेंद्र साहेब की विशेष भूमिका रही। वहीं आश्रम व्यवस्थापक सुशांत साहेब एवं दीनेंद्र साहेब का सानिध्य भी कार्यक्रम को प्राप्त हुआ।

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