जयस्तम्भ चौक पर भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न, संस्कृति-संस्कार और राष्ट्र निर्माण का दिया गया सशक्त संदेश



बालोद। हिंदू समाज की संगठनात्मक मजबूती, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नगर बालोद में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। नगर के हृदय स्थल जयस्तम्भ चौक पर आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति एवं युवा वर्ग की गरिमामय उपस्थिति रही। सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रांत सेवा प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ श्री तुलसीदास जी ने हिंदू संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र निर्माण में हिंदू समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पंच परिवर्तन के पाँच सूत्र—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आग्रह एवं नागरिक कर्तव्य—को रेखांकित करते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के माध्यम से व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का सशक्त निर्माण संभव है। उन्होंने समाज को संगठित रहने, सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि गौ सेवक एवं कथावाचक श्री पुरुषोत्तम राजपूत जी ने अपने ओजस्वी विचारों से हिंदू संस्कृति, संस्कार और एकता के महत्व को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने समाज सेवा एवं राष्ट्रहित में सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए गौविज्ञान की वैज्ञानिक उपयोगिता और गौ-संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाज प्रमुखों का भव्य एवं गरिमामय सम्मान रहा। साथ ही हिंदू सम्मेलन नगर आयोजन समिति बालोद द्वारा नगर की विभिन्न महिला मानस मंडलियों को स्मृति-चिन्ह एवं भारत माता का छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति का सराहनीय योगदान
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति में संयोजक दीपक यादव, सह-संयोजक श्री गंगाधर सोनबरसाजी एवं श्रीमती पद्मिनी साहू, कोष प्रमुख श्री राहुल जाजू तथा प्रचार-प्रसार प्रभारी श्री विमल राखेचा, श्री छगन यादव, श्री संतोष दुबे, श्री हरीश दहिया, श्री पवन गौतम, श्रीमती रानी योगी, श्रीमती ममता मधुकांत यदू, श्री छोटेलाल चंद्राकर, श्रीमती रोहनी साहू, श्रीमती पूजा जैन, श्री संदीप बन्देवार, श्रीमती कादम्बिनी यादव, श्री किशन देवांगन, श्री भागीरथी यादव, श्री हिम्मत जी एवं श्री पोखन जी का विशेष योगदान रहा। भव्य हिंदू सम्मेलन ने समाज में एकता, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के प्रति नई ऊर्जा का संचार करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश दिया।

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