न्यायालयीन निर्देशों की अवहेलना: वेतन रोक एवं युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में मनमानी के विरोध में राज्य शिक्षक सम्मान एवं मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण लौटाने उचित मार्गदर्शन एवं माध्यम बताने में जानबूझकर किया जा रहा है विलंब



बालोद। प्रभावित शिक्षक रघुनंदन गंगबोईर, व्याख्याता (गणित), शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जमरुवा, जिला बालोद, तथा उनकी पत्नी श्रीमती पुष्पा गंगबोईर, सहायक शिक्षक (अंग्रेजी), शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भोइनापार, जिला बालोद , पिछले लगभग एक वर्ष से प्रशासनिक मनमानी, नियम विरुद्ध वरिष्ठता निर्धारण, तथा युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में की गई गंभीर अनियमितताओं का शिकार हैं। जिस पर उन्होंने मीडिया से बातें साझा करते हैं बिंदुवार अपनी समस्या और विभाग की शिकायतें रखी है, जैसे कि….

  1. वरिष्ठता निर्धारण में गंभीर त्रुटि एवं न्यायालय की अवमानना।

उन्होंने कहा कि मेरे विरुद्ध जिला शिक्षा विभाग द्वारा सिविल सेवा अधिनियम, 1961 की धारा 12(क) के स्पष्ट प्रावधानों की अवहेलना करते हुए, कनिष्ठ व्याख्याता को बचाने के उद्देश्य से मुझे कनिष्ठ दर्शाकर अतिशेष सूची में सम्मिलित कर दिया गया। जबकि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका क्रमांक WPS 4927/2025 दायर की गई थी।
माननीय न्यायालय ने शासन को निर्देशित किया था कि “अभ्यावेदन प्राप्त कर न्याय संगत निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखें एवं मूल संस्था में कार्यभार जारी रखते हुए वेतन प्रदाय सुनिश्चित किया जाए।”
परंतु इसके विपरीत, न तो मुझे मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण कराया गया, और न ही पिछले 5 से 6 माह से वेतन प्रदान किया गया।यह आदेश की प्रत्यक्ष अवहेलना है तथा न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है।

  1. संभाग एवं जिला स्तर पर अभ्यावेदन अमान्य कर भटकाया गया

मेरे द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को जिला एवं संभाग स्तरीय समितियों द्वारा बिना नियमों का अध्ययन किए, मुद्दे को भटकाते हुए केवल “कार्यभार ग्रहण तिथि” जैसे विषयों पर निर्णय कर अमान्य घोषित कर दिया गया। जबकि न तो सिविल सेवा अधिनियम 1961 /1966 12 (क) में, और न ही युक्तियुक्तिकरण नियम 7(सी) में “कार्यभार ग्रहण” को वरिष्ठता निर्धारण का आधार माना गया है। इस प्रकार की निर्णय प्रक्रिया न केवल त्रुटिपूर्ण है, बल्कि लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों एवं उच्च न्यायालय के आदेश की सीधी अवमानना है।

  1. पत्नी श्रीमती पुष्पा गंगबोईर के मामले में पदस्थापना अनियमितता

पदोन्नति के समय जानबूझकर ऐसे विद्यालय में पदस्थापना की गई,
जहाँ अंग्रेजी विषय का शिक्षक पहले से पदस्थ था जबकि उसी समय जिला मुख्यालय स्थित अनेक विद्यालयों में अंग्रेजी विषय के पद रिक्त थे। यह कार्यवाही नियम 10 (युक्तियुक्तिकरण नियमावली) के विपरीत है, जो स्पष्ट करता है कि “अधिक दर्ज संख्या वाले विद्यालय में पदस्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी।” इस विषय पर दाखिल याचिका WPS 5890/2025 में माननीय उच्च न्यायालय ने भी
“अभ्यावेदन प्राप्त कर न्यायसंगत निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखने” का निर्देश दिया था,
परंतु समिति द्वारा निर्णय को “पारिवारिक कारण” में भटका कर अस्वीकार किया गया।
यह आदेश भी न्यायिक निर्देशों की अवहेलना है।

  1. वेतन रोके जाने से उत्पन्न मानसिक, पारिवारिक एवं सामाजिक कष्ट

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट उल्लेख है कि “वेतन केवल न्यायालयीन स्थगन आदेश की स्थिति में ही रोका जा सकता है।”0फिर भी पिछले 5–6 महीनों से मेरा वेतन रोक दिया गया है,जिससे दीपावली जैसे पर्व पर भी परिवार को गंभीर आर्थिक, मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, दायित्व निर्वहन, और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी संकटग्रस्त हो गई है।
यह स्थिति एक शिक्षक वर्ग कर्मचारी के सम्मान और जीविकोपार्जन के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का घोर उल्लंघन है।

  1. राज्य शासन से मार्गदर्शन न मिलना

सम्मान वापसी से पूर्व, लगभग दो माह पूर्व मैंने राज्य शासन के जन शिकायत पोर्टल पर उचित मार्गदर्शन एवं वैधानिक प्रक्रिया जानने हेतु आवेदन किया था, परंतु आज दिनांक तक शासन स्तर से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
यह शासन के जन उत्तरदायित्व सिद्धांत की उपेक्षा को दर्शाता है।

  1. सम्मान वापसी की मार्गदर्शन एवं माध्यम बताने में विलंब

इन परिस्थितियों में, शासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा नियमों की निरंतर अवहेलना, न्यायालय के आदेश की अनदेखी, तथा मेरी और मेरी पत्नी की सेवा, सम्मान और आत्मसम्मान के साथ किए जा रहे न्यायिक अन्याय और मानसिक उत्पीड़न के विरोधस्वरूप मैं निम्नलिखित राज्य स्तरीय सम्मान स्वेच्छा से वापस करने का निर्णय करता हूँ:

  1. राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार (शिक्षा सत्र 2021…)
  2. मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण (शिक्षा सत्र …2016…)
  3. एक अपील

मैं भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ राज्य शासन से निवेदन करता हूँ कि

न्यायालयीन आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित की जाए।

युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हेतु स्वतंत्र समिति गठित की जाए।

वेतन पुनः बहाल कर शिक्षकों की सम्मानजनक जीवनयापन सुनिश्चित किया जाए।

भविष्य में किसी भी शिक्षक के साथ इस प्रकार का मनमाना व्यवहार रोकने हेतु सिविल सेवा अधिनियम एवं युक्तियुक्तिकरण नियमावली में दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाएं।

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