दिवाली आते ही कलंकित कर रहे हैं पत्रकारिता को तथाकथित पत्रकार, पंचायतों से हो रही अवैध वसूली, सरपंचों ने थाने में भी की शिकायत, सरकारी दफ्तरों में भी दे रहे दस्तक…



बाहरी पत्रकार भी भेज रहे सरपंचों को व्हाट्सएप पर फर्जी बिल और विज्ञापन की पोस्ट, डर में महिला सरपंचों ने भेज भी दिया है पैसा

बालोद। इन दिनों बालोद जिले में तथाकथित पत्रकारों की अवैध वसूली का सिलसिला चरम पर पहुंच चुका है। कारण है सामने दिवाली त्योहार। हर साल दिवाली हो या होली हो ऐसे पत्रकार जो बिल में छुपे रहते हैं, साल भर जिन्हें पत्रकारिता से कोई सरकार नहीं होता, जिन्हें ना खबर लिखना आता है ना न्यूज़ कवरेज करने जाते हैं, वह त्योहार आते ही पंचायत और सरकारी दफ्तरों, विभागों में दस्तक देने लग जाते हैं। आजकल तो ऑनलाइन का जमाना है। लोगों को व्हाट्सएप पर ही मैसेज करके क्यूआर कोड भेज कर दिवाली में मिठाई खर्च और पटाखे तक की मांग होने लगी है। ऐसे तथाकथित कलमकारों की वजह से आज पत्रकारिता कलंकित नजर आ रही है। तो वही एक दिलचस्प मामला गुरुर ब्लॉक में सामने आया है। जिसमें बाहर के पत्रकारों के गिरोह द्वारा ब्लॉक के सरपंचों के व्हाट्सएप पर फर्जी विज्ञापन बिल भेजे जा रहे हैं। किसी को 3000 किसी को 2000 किसी को 4000 का बिल आया है। उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर प्रकाशित विज्ञापन, जिसमें सिर्फ सरपंच, सचिव के नाम बस लिखे हैं वह भी बिना फोटो के पोस्ट को भेज कर बकायदा दबाव बनाया जा रहा है कि आपका विज्ञापन लगा था, इसका पेमेंट भेजिए।

इस मामले को लेकर सतर्क होते हुए गुरुर ब्लॉक के सरपंच संघ के अध्यक्ष डाकेश साहू ने अपने सरपंच साथियों के साथ बीते दिनों गुरुर थाने पहुंचकर मामले की शिकायत भी की है। वहीं कुछ व्हाट्सएप नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। जिनके माध्यम से स्थानीय सरपंचों को मैसेज करके पैसे की डिमांड की जा रही है। डाकेश साहू ने बताया कि अधिकतर महिला सरपंचों को उक्त लोग खुद को मीडिया वाले बता कर दबाव बना रहे हैं और कुछ से पैसे भी ले लिए हैं। डर के कारण कहे या जानकारी के अभाव में कुछ महिला सरपंचों ने दिए गए स्कैनर क्यूआर कोड पर पैसे भी भेज दिए हैं।

आज तक 24 न्यूज़,दैनिक रुद्रांश दर्पण ,दैनिक श्रेष्ठ न्यूजपेपर सत्य की आवाज आदि कई नाम से बिल बाकायदा ग्राम पंचायतो को जारी किए गए हैं । जिसमें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना संदेश और 3000 से 4000 राशि उल्लेख करते हुए बिल भेजे गए हैं।

विज्ञापन के नाम पर सिर्फ डेमो डिजाइन में सरपंच और सचिवों का नाम लिखकर भेजा जा रहा है कि आपका स्वतंत्रता दिवस में विज्ञापन लगा था उसी का पेमेंट करना है। जो लोग इस फर्जी मीडिया वालों से अनजान हैं ऐसे सरपंच खासतौर से महिला सरपंच घबराहट में दबाव में आकर तथाकथित मीडिया वालों को पेमेंट तक भी कर चुके हैं । सरपंच संघ अध्यक्ष ने सभी सरपंचों को ऐसे वसूलीबाज लोगों से आगाह किया है। उन्होंने बताया कि गुण्डरदेही ब्लॉक में भी इस तरह की शिकायत आई है। वहां भी सरपंचो द्वारा थाने में शिकायत की जा रही है।

मामले की जानकारी मिलने पर जब हमने थाने में दिए गए आवेदन में उल्लेख कुछ नंबरों पर कॉल किया तो पता चला कि यह गिरोह भोपाल के हैं और इस तरह से कई ब्लॉक के सरपंचों को विज्ञापन छपा है, कहकर मैसेज भेज रहे हैं। जबकि सरपंचों का कहना है कि हमने किसी को कोई विज्ञापन इस तरह से नहीं दिया है, ना कोई हमसे बात हुई है, ना कोई पंचायत में विज्ञापन संबंधी मिलने आया था। फिर भी फर्जी तरीके से कुछ मीडिया संस्थानों जिनकी भूमिका, पंजीयन नम्बर भी संदिग्ध है, के द्वारा बिल भेज कर लोगों से वसूली का दबाव बनाया जा रहा है।

पत्तलकार पत्रकारों की आ गई बाढ़, विभाग सहित पंचायत में पहुंच रहे होकर कार में सवार

वही दिवाली आते ही कई पत्तलकार पत्रकार जिनकी वजह से पत्रकारिता अक्सर कलंकित होती रहती है, अवैध वसूली, दबाव बनाना, ख़िलाफ़ में खबरों का भय दिखाना, सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग कर परेशान करना, अधिकारियों की चापलूसी कर अपनी झूठी पत्रकारिता दिखाना आदि कई तरीकों से मीडिया को अपनी स्वार्थ भावनाओं, मनोकामना पूर्ति के लिए इस्तेमाल करना जिनका पेशा बन चुका है, ऐसे तथाकथित पत्रकार भी इन दिनों विभिन्न सरकारी विभागों के दफ्तर और पंचायत के कार्यालय सहित अन्य नगर पंचायत, नगर पालिका आदि जगहों पर देखे जा रहे हैं। ऐसे ये तथाकथित पत्रकार बाकायदा खुद का रौब और रुतबा दिखाने के लिए सामूहिक रूप से कार तक में सवार होकर पहुंच रहे हैं। इनमें ऐसे कई तथाकथित पत्रकार हैं जिनको खबर लिखना तक भी नहीं आता, ना विज्ञप्ति एडिटिंग करना जानते हैं। ऐसे लोग जो दूसरे मेहनती पत्रकारों की खबरों को कॉपी पेस्ट करके अपनी झूठी पत्रकारिता दिखाते हैं, वे दिवाली आते ही बाकायदा अपने हिस्से का पटाखा और मिठाई खर्च के नाम पर पैसा वसूलने के लिए सरकारी दफ्तरों और पंचायत में पहुंच रहे हैं। कुछ सरपंच, सचिव या अधिकारी, कर्मचारी दबाव में आकर या डर के कारण इन्हें सहयोग स्वरूप पैसा दे भी देते हैं।

पर इस तरह से हो रही अवैध वसूली के चलते पत्रकारिता तो दिन-ब-दिन बदनाम होती जा रही। इनके कारण जो पत्रकार ईमानदारी से काम करते हैं वे बेवजह के बदनाम होते हैं। कुछ तथाकथित फर्जी पत्रकारों की गलतियों और की गई अवैध वसूली के चलते सभी पत्रकारों को एक नजरिए से देखने लग जाते हैं। स्थिति यह भी है कि बालोद जिले में कुछ तथाकथित पत्रकार अलग-अलग मामलों खासकर नौकरी लगाने और जमीन खरीदी बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल तक जा चुके हैं और आज भी बेशर्मी के साथ पत्रकारिता करते दिखाई दे रहे हैं।

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