बालोद। बालोद जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय में पदस्थ दो क्लर्क (बाबू) युगल किशोर साहू और सुरेंद्र कुमार सोनकर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018 ) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत के साथ रंगे हाथ पकड़ा है। एसीबी द्वारा शिकायतकर्ता मुकेश कुमार यादव की सूचना के आधार पर जाल बिछाकर उसे पकड़ा गया। शिकायतकर्ता को पैसे देकर भेजे गए थे। जिसमें फेनोल्पथीलीन केमिकल (पाउडर) मिलाया गया था। जैसे ही दोनों बाबू ने रिश्वत के पैसे लिए, उनके हाथों में केमिकल लग गया और कुछ देर बाद जाल बिछाए रिश्वत खोर पकड़ने के लिए बैठे एसीबी की टीम ने दोनों बाबुओं को दबोच लिया। दोनों के हाथों का टेस्ट लिया गया तो उसमें केमिकल का कलर सामने आया। इस तरह दोनों बाबू रिश्वत लेते रहेंगे हाथ पकड़े गए। मजेदार बात यह है कि अपने ही विभाग में पदस्थ एक स्टाफ से ही उन्होंने विभागीय काम करने के बदले रिश्वत मांगी थी। कुल 50000 की रिश्वत मांगी गई थी। जिसमें से शिकायत कर्ता मुकेश कुमार यादव द्वारा ₹20000 पहले ही दिया जा चुका था। गुरुवार को 30000 उन्हें दिया गया। इसी दौरान एसीबी ने दोनों आरोपी को पकड़ लिया। देर शाम तक कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई चलती रही अन्य दस्तावेजों की छानबीन भी होती रही। यह जानने का भी प्रयास किया जा रहा है कि इस तरह और कहीं कार्यालय में कोई रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा है। वहीं कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हलचल मचा हुआ है उच्च अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटना से हम सब स्तब्ध हैं। सोचे नहीं थे कि दोनों क्लर्क इस तरह की हरकत करेंगे। दोनों विभाग में पदस्थ नियमित कर्मचारी हैं। इस मामले में जब हमने सीएमएचओ से विभागीय कार्यवाही को लेकर जानने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
जानिए मामला क्या था?
जानकारी अनुसार आरोपी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं। आरोपी बाबू युगल किशोर साहू और सुरेंद्र कुमार सोनकर ने सीएमएचओ कार्यालय के वाहन चालक मुकेश कुमार यादव से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। प्रार्थी ने बताया कि उसका डिमोशन कर चौकीदार पद पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरुर में पदस्थ कर दिया गया था। उसने इस आदेश के खिलाफ बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां से उसे स्टे आदेश मिला। कोर्ट के आदेश के बाद जब वह फिर से वाहन चालक पद पर बहाल हुआ, तब सर्विस बुक सत्यापन और एरियर निकालने के नाम पर दोनों बाबुओं ने रिश्वत की मांग की।

प्रार्थी की शिकायत के अनुसार, आरोपी बाबू पहले ही 20 हजार रुपए एडवांस के रूप में ले चुके थे। शेष 30 हजार रुपए गुरुवार को देने की बात तय हुई थी। प्रार्थी ने इसकी शिकायत एसीबी रायपुर में दर्ज कराई, जिसके बाद टीम ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप की कार्रवाई की।जैसे ही प्रार्थी ने दोनों बाबुओं को 15-15 हजार रुपए (कुल 30 हजार) दिए, एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। उनके हाथों पर फिनॉल्फथेलीन टेस्ट किया गया जो पॉजिटिव निकला। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि युगल किशोर साहू और सुरेंद्र कुमार सोनकर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
