देवारी आगे येदे बाँचे हे दू चार दिन,
फेर पेरोसी माटी सनइया नइ दिखे।
घर घर होंगे गा गैस चूल्हा इंडक्शन,
अब चूल्हा गोरसी बनइया नइ दिखे।
चूना डिस्टेम्पर पोतइया होगे सब,
पिंवरी छूही के लिपइया नइ दिखे।
कइसे लेबो लोग लइका बर कपड़ा,
संसो करत भउजी भइया नइ दिखे।
चारो मुड़ा पक्की ईटा के परदा होगे,
कुम्हड़ा नार बर लड़इया नई दिखे।
राउत ममा चढ़थे सोजहा काछन,
छानी खपरा के फोड़इस नइ दिखे।
गली खोर लागथे जी सुन्ना सुन्ना,
सुवा करमा के नचइया नइ दिखे।
सब पीके मगन रहिथे अपन म,
लोगन ल बने समइया नइ दिखे।
देवारी आगे येदे बाँचे हे दू चार दिन,
फटाका बर लइका रोवइया नइ दिखे।
लिखइया – नोकेश तांडे
ग्राम – अर्जुनी (ग़ुरूर) जिला – बालोद
