बालोद । छत्तीसगढ़ दस्तावेज लेखक एवं स्टाम्प विक्रेता जनकल्याण संघ परिवार के आह्वान पर 16 सितंबर, मंगलवार को प्रदेशभर में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जा रही है। संघ ने इस हड़ताल के माध्यम से शासन-प्रशासन को अपनी चार सूत्रीय मांगों से अवगत कराते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है। तहसील दस्तावेज लेखक संघ बालोद के पदाधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर के दस्तावेज लेखक महेंद्र सिंह ठाकुर की पुलिस द्वारा बिना जांच के की गई गिरफ्तारी का संघ कड़ा विरोध करता है। उनकी तत्काल रिहाई और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

इसके साथ ही दस्तावेज लेखकों की वर्षों पुरानी मानदेय वृद्धि तथा स्टाम्प वेंडरों की कमीशन बढ़ाने की भी प्रमुख मांग की गई है। चार सूत्रीय मांगो को लेकर प्रदेश व्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर प्रदेश के सभी जगहों के दस्तावेज लेखक व स्टाम्प वेंडर हड़ताल पर थे। इसी परिपेक्ष में तहसील दस्तावेज लेखक संघ बालोद कलम बंद सांकेतिक हड़ताल पर रहा। दस्तावेज लेखक संघ के जिला अध्यक्ष लक्ष्मी दुबे,दस्तावेज लेखक शिव गौतम, मो.जुनैद कुरैशी,जनक चंद्राकर,जीतेन्द्र पटेल लालू, सोमेश कुमार साहू, शाहिद खान,गोल्डी गौतम, देवनारायण पटेल, भूपेंद्र चंद्राकर,वैभव शर्मा,रूप किशन साहू,मनोहर साहू, डिलेश्वर, जयंतमुरचुलिया,योगेश साहू, एवं दस्तावेज लेखक स्टाम्प वेंडर शामिल थे।
हड़ताल से आम नागरिकों को भारी परेशानी

इस सांकेतिक हड़ताल का असर मंगलवार को जिलेभर में देखने को मिला। हड़ताल के कारण जमीन की खरीदी-बिक्री संबंधी रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप रहे। साथ ही तहसील कार्यालय में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, शपथ पत्र तथा विभिन्न प्रकार के आवेदन प्रस्तुत करने वाले आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही तहसील कार्यालय पहुंचे लोग निराश होकर वापस लौटे। नागरिकों ने बताया कि आवश्यक दस्तावेज़ तैयार न होने से बच्चों की पढ़ाई, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और अन्य जरूरी काम प्रभावित हुए। अचानक हुई इस हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को सबसे अधिक परेशानी हुई। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, इसलिए मजबूरन सांकेतिक हड़ताल करनी पड़ी।
