दीन दुखियों की मदद के साथ , जरूरतमंद बच्चों को शिक्षण सामग्री स्वयं के खर्च पर देती है
वनांचल में माहवारी के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाती है मोना
डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। हम डौंडी ब्लॉक के घने जंगली इलाके में स्थित मरदेल गांव की शिक्षिका मोना रावत से आपका परिचय करवा रहे हैं। जो अभाव के बावजूद शिक्षा में प्रभाव दिखा रही है। उनकी कोशिश सिर्फ स्कूल की कक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वे अपनी नवाचारी गतिविधियों, जागरूकता के कार्यक्रमों को जनता तक भी पहुंचा रही है और उनकी पहल से सभी जागरूकता अभियान में लोगों की भागीदारी भी दिखती है । शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मरदेल में पदस्थ शिक्षिका मोना रावत शिक्षकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं ।वनांचल में होने के बावजूद अपने स्कूल के नाम को रोशन करने, अपनी नवाचारों को पूरे जिले में फैलाने में उनका विशेष योगदान रहा है। जिसके लिए वे सिर्फ बच्चों को पढ़ाई ही नहीं इसके साथ-साथ कई गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं।

अपने स्कूल के निः सहाय और कमजोर बच्चों को जूता, मोजा और स्कूल बैग देकर उन्हें सहायता करती हैं। साथ ही समय-समय पर स्कूल के बालिकाओं को माहवारी एवं “पेड यूज” पर चर्चा कर उचित सलाह देती हैं । आमतौर पर गांव में महिलाएं और छात्राएं माहवारी आने पर पेड का नहीं बल्कि गंदा कपड़ा इस्तेमाल करती है। जिससे संक्रमण का खतरा रहता है। जिससे क्या नुकसान होते हैं, इन सब बारीकियों से मोना बालिकाओं और महिलाओं दोनों को अवगत कराती है, उन्हें पेड इस्तेमाल करने प्रेरित करती है। विद्यालय के भौतिक विकास के लिए उन्होंने अपनी स्कूल के बच्चों को कापी, पेन का भी वितरण किया है।
शासन की जागरूकता और प्रेरणादायक अभियानों में भी भूमिका

शासन की विभिन्न अच्छी योजनाओं के तहत भी वह सक्रियता से काम करती हुई जागरूकता अभियान चलाती हैं। इसके तहत लगातार वनांचल के लोगों को साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के बारे में भी जानकारी देती है। समय-समय पर उनके द्वारा विविध गतिविधि की जाती है । बुजुर्ग महिलाओं की सेवा और एक बेसहारा मां की सहारा भी वह बनी हुई है। साथ ही समाज को बेजुबानों के प्रति विशेष संदेश देने के लिए उन्होंने गौरैया को बचाने, उनके लिए दाना पानी की व्यवस्था करने के लिए 300 सकोरे भी बीते गर्मी में बांटे हैं। बच्चे आठवीं के बाद आगे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित हो इसके लिए लगातार उनके पालकों से संपर्क करती है और उन्हें बच्चों को सपोर्ट करने के लिए मनाती है। जिसके कारण बच्चे आगे पढ़ाई कर पाते हैं। राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए भी उनके द्वारा घर घर तिरंगा अभियान चलाया जाता है। साथ ही हेलमेट जागरूकता अभियान को लेकर भी उन्होंने इस बार खास पहल की थी। 15 अगस्त पर प्रभात फेरी में पालकों ने हेलमेट पहनकर उनके नेतृत्व में गली भ्रमण किया। साथ ही चौक चौराहों पर खास कर बाइक चालकों को हेलमेट की अहमियत बताई गई। इस तरह देख सकते हैं कि कैसे मोना अपनी नवाचारी गतिविधियों से शिक्षा ही नहीं समाज के हर पहलुओं पर ध्यान देती है। यही उनके काम की असली पहचान है।
