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बस्तर की सूरत बदलने में जुटे हैं उमाशंकर, कहते हैं-शिक्षा केवल पढ़ाने का कार्य नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और बदलने का माध्यम है

डीबी डिजिटल मीडिया बस्तर।शिक्षक दिवस के इस अवसर पर हम बस्तर जिले के एक शिक्षक उमाशंकर साहू की सफलता और उसके पीछे किए संघर्षों को सामने ला रहे हैं ताकि दूसरे शिक्षक भी उनसे प्रेरणा ले सकें। शिक्षक उमाशंकर साहू की सफलता की ये कहानी इस बात का प्रमाण है कि साधारण परिस्थितियों में भी असाधारण कार्य किए जा सकते हैं। वे मानते हैं कि – “शिक्षा केवल पढ़ाने का कार्य नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और बदलने का माध्यम है।”वर्तमान में जुलाई 2025 से प्राथमिक शाला ओड़ारकोट में कार्यरत हैं। आज बस्तर के बच्चे शिक्षा में नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं और इसका श्रेय उनके अथक परिश्रम, समर्पण और नवाचारी सोच को जाता है। तो शुरू करते हैं उनका शिक्षक बनने का ये सफर…..। शिक्षक उमाशंकर साहू छत्तीसगढ़ के ग्राम मंदलोर, जिला रायपुर के निवासी हैं। एक साधारण निम्न–मध्यमवर्गीय परिवार से आने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना जीवन–ध्येय बनाया। सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर शिक्षक बनने तक की उनकी यह यात्रा आज सैकड़ों विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा है। उमाशंकर साहू की शिक्षा की नींव गाँव के सरकारी विद्यालय से पड़ी। आठवीं तक की पढ़ाई गाँव में तथा आगे 12वीं तक की शिक्षा भी सरकारी स्कूल में हुई। वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे। वर्ष 2013 में उन्होंने अपने ही गाँव के स्कूल से शिक्षक के रूप में अपनी सेवाओं की शुरुआत की। यह उनके जीवन का पहला सुनहरा अवसर था। वर्ष 2015 में उनका चयन प्रेरक पद पर हुआ, जिसने उन्हें शिक्षा और समुदाय को जोड़ने का अवसर दिया।

विभिन्न संस्थानों में दी सेवाएँ

2017 से 2022 तक वे श्री रावतपुरा सरकार महाविद्यालय, नया रायपुर में कार्यरत रहे। यहाँ उन्होंने बी.एड. और डी.एल.एड. के शिक्षार्थियों को शिक्षा प्रदान की। उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि 100 से अधिक विद्यार्थी आज शिक्षक बनकर समाज में सेवा दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में भी सेवा दी, जहाँ बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक वातावरण में बच्चों को पढ़ाने का अनुभव प्राप्त हुआ।

ऐसा है उनका बस्तर में योगदान और नवाचार

जून 2022 में उनकी नियुक्ति जिला बस्तर के आदिवासी अंचल में हुई। यहाँ उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अनेक नवाचारी कार्य किए जिसे–

  1. साबुन बैंक की स्थापना (मावलीगुड़ा, 2023) – बच्चों और समुदाय को स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए।
  2. शाला संग्रहालय (बड़ेपारा, फरसागुड़ा) – स्थानीय संस्कृति और मातृभाषा से बच्चों को जोड़ने के लिए।
  3. विज्ञान प्रयोग – विज्ञान को सरल और रोचक बनाने के लिए खेल और TLM आधारित प्रयोग।
  4. विशेष जागरूकता दिवस (प्रत्येक शनिवार) – धूम्रपान, मलेरिया, एनीमिया, पॉक्सो एक्ट, गुड टच–बैड टच आदि विषयों पर चर्चा।
  5. रचनात्मक गतिविधियाँ – स्केच ड्राइंग, पेंटिंग, राखी बनाना, सजावटी कार्य।
  6. समर क्लास – विज्ञान और गणित में विशेष कक्षाएँ, जिससे कई विद्यार्थियों का चयन एकलव्य विद्यालय में हुआ।

सामाजिक पहल भी हैं ये उनके

साक्षरता रैली और मतदाता जागरूकता रैली का आयोजन।

बैगलेश डे पर बच्चों को कहानी वाचन व अभिव्यक्ति का अवसर।

अभिभावकों को शिक्षा से जोड़ने के लिए नियमित बैठकें और कार्यशालाएँ।

सम्मान और उपलब्धियाँ

शिक्षा क्षेत्र में किए गए योगदान और नवाचारी कार्यों के लिए श्री उमाशंकर साहू को विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया गया है। जैसे राज्य स्तरीय सम्मान – छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नवाचार व प्रेरणादायक शिक्षक के रूप में पहचान, मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरस्कार – उत्कृष्ट शैक्षिक कार्यों और समाज को शिक्षा से जोड़ने के लिए, राष्ट्रीय प्रतिभा अलंकरण (साहित्य मंथन शिक्षा दूत) – शिक्षा और साहित्य में विशेष योगदान हेतु, राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न सम्मान – नवाचारी शैक्षिक पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए, प्रतिभावान सम्मान पुरस्कार – बच्चों में रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयासों के लिए मिले हैं। इसके अलावा स्वच्छता अभियान, विज्ञान प्रयोग, नवाचारी शिक्षण और सामुदायिक सहभागिता पर आधारित कार्यों के लिए जिला स्तर पर भी कई सम्मान मिलें हैं।

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