किताबी ज्ञान के साथ बच्चों को बताते हैं त्योहारों के पीछे की पौराणिक कथा और उनका महत्व, नैतिक शिक्षा पर भी जोर देती हैं अर्चना चौरसिया



डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। शिक्षक दिवस पर हम आज एक शिक्षिका अर्चना चौरसिया के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने कई नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। 14 साल तक शासकीय प्राथमिक शाला पीपरछेड़ी में सहायक शिक्षक के पद पर रही अर्चना चौरसिया 2023 में पदोन्नत होकर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मिशन सांकरा विकासखंड बालोद में विज्ञान के शिक्षक के रूप में अभी अपनी सेवा दे रही है। बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए अर्चना चौरसिया लगातार स्कूल में विविध गतिविधियों को करवा कर उनमें जागरूकता लाने और नैतिक शिक्षा पर भी जोर देती है।

अपने इन्हीं कार्यों के चलते उन्हें 2017-18 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरस्कार शिक्षादूत मिल चुका है। इस सम्मान के दौरान मिले हुए 5000 की राशि को भी उन्होंने शाला सृजन कक्ष की रंगाई, पुताई, पेंटिंग आदि पर खर्च करके आकर्षक बनवाया। ऐसे ही कुछ नवाचार के वर्तमान में सांकरा मिडिल स्कूल में कर रही है। जहां पर विज्ञान की गतिविधियों को खास प्रोत्साहित करते हुए बच्चों में पढ़ाई के प्रति रोचकता पैदा करती है। उनके द्वारा बच्चों को मार्गदर्शन कर विज्ञान प्रदर्शनी के लिए कई मॉडल बनाए जाते हैं। जिन्होंने ब्लॉक और जिले में बेहतर स्थान प्राप्त किए हैं। स्कूल में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ वे हमारे देश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न त्योहारों के पीछे की पौराणिक कथा और उसके महत्व के बारे में भी बच्चों को समझाती हैं।

उन्होंने कहा कि स्कूल के सभी शिक्षक पूरे मन से शिक्षा प्राप्त करने, प्रदान करने के साथ बच्चों में नैतिक शिक्षा पर जोर देते हैं और स्कूल में बच्चों द्वारा नवाचार कर विज्ञान मॉडल प्रदर्शन, चित्रकला, रंगोली, महापुरुषों की जयंती, समुदाय के साथ वृक्षारोपण, मातृ पितृ दिवस, आनंद मेला, पाक कला, कृष्ण जन्माष्टमी जैसे उत्सव मना कर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सहभागी बनाया जाता है। इस बीच में त्योहारों के इतिहास के बारे में भी बताया जाता है। इस तरह स्कूल में सिर्फ पुस्तकों की पढ़ाई नहीं होती बल्कि भविष्य को गढ़ने के लिए कई गतिविधियां यहां बच्चों के बीच कराई जाती है। शिक्षिका अर्चना चौरसिया ने कहा कि हमेशा अपना 100% देने का प्रयास करती है। बच्चों में विज्ञान के प्रति पढ़ाई में दिलचस्पी जगाने के लिए उदाहरण और मॉडल के माध्यम से समझाने का प्रयास उनके द्वारा किया जाता है। विज्ञान की कौतूहलता से भी बच्चों को परिचित करवाया जाता है।

कवयित्री और लेखिका के रूप में भी है इनकी पहचान

श्रीमती चौरसिया की साहित्यिक क्षेत्र में विशेष रूचि है। वे कविताएं भी लिखती हैं। बालोद जिले में उनकी शिक्षक के साथ-साथ कवयित्री और लेखिका के रूप में भी विशिष्ट पहचान है। चौरसिया समाज के सामाजिक पत्रिका में उनकी रचित कई कविताएं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा स्थानीय मीडिया जैसे डेली बालोद न्यूज़ और अन्य डिजिटल मीडिया में भी उनकी कविता ने स्थान बनाया है।वे छत्तीसगढ अखिल भारतीय चौरसिया महासभा की सचिव पद पर कार्य कर चुकी हैं। नवाचारी शिक्षक के रूप में भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। जिला स्तर पर उन्हें पाटेश्वर धाम में विश्व शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया गया था।

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