1999 के दौर में थी जिला पंचायत सदस्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में पहले से है सक्रिय, मिल चुके बसंती पिकेश्वर को कई सम्मान



डीबी डिजिटल मीडिया डौंडीलोहारा। डौंडीलोहारा ब्लॉक के पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला संबलपुर में सहायक शिक्षिका के रूप में पदस्थ बसंती पिकेश्वर अपने शिक्षक के रूप में सफर शुरू करने से पहले ही शिक्षा और समाज सेवा के कार्य में सक्रिय रही है। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि जब बालोद जिला दुर्ग में शामिल था तो 1999 से 2004 के पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान बसंती पिकेश्वर जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी है। इस दौरान उन्होंने कई समाज सेवा और जनहित के कार्य किए। शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने के साथ-साथ ही उन्होंने समाज सेवा और जागरूकता के काम कभी नहीं छोड़ा। खासकर वनांचल की महिलाओं के बीच फैले अंधविश्वास को दूर करने का बीड़ा उठाते हुए उन्होंने कई गतिविधियों को अंजाम दिया जिसके लिए उन्हें विभिन्न मंचों, संगठन ,समाज , संस्थाओं और शासन द्वारा सम्मान भी मिल चुके हैं। इस शिक्षक दिवस पर हम बहुमुखी प्रतिभा की धनी बसंती के बारे में बता रहे हैं जो वर्तमान में स्काउट गाइडिंग और कब बुलबुल के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवा रही है। मूलतः संजय नगर डौंडीलोहारा की रहने वाली शिक्षिका बसंती पिकेश्वर पति दयालूराम पिकेश्वर शिक्षा के साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए भी काम कर रहीं हैं। वनांचल में खासतौर से महिलाओं को शिक्षित करने, उन्हें अंधविश्वास से बचाने, कुप्रथाओं को लेकर समाज में जागरूकता लाने के लिए वह काम करती है। संबलपुर से पहले वह शासकीय प्राथमिक शाला सोरली में भी पदस्थ थी। उनके कार्यों के चलते उन्हे शिक्षा नारी शक्ति प्रतिभा रत्न का सम्मान 2023 पुरस्कार से उन्हें शिक्षक कला व साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ ने सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण, शिक्षा दूत पुरस्कार 2022, भारत स्काउट गाइड में योग्यता प्री एल टी फ्लॉक लीडर, 2015 -16 से 2021-22 तक 38 बुलबुल, 23 कब गोल्डन एरो अवार्ड, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हो चुका है. तो वही ईसीसीई मास्टर ट्रेनर्स, योग मास्टर ट्रेनर्स, अंगना म शिक्षा मास्टर ट्रेनर्स, अंगना में शिक्षा 2.0 मास्टर ट्रेनर्स, एफएलएन मास्टर ट्रेनर्स और मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका वे निभा चुकी हैं।

कब बुलबुल में बसंती ने दिलवाया था राष्ट्रीय स्तर पर सोरली स्कूल को पहचान

पिछले साल राष्ट्रीय कब बुलबुल महोत्सव बिहार के बेगूसराय जिला गढ़हरा-बरौनी में हुआ था। जहाँ छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चे झूम उठे एवं अधिकारी ग्रुप डांस छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था. इसी के साथ बिहार में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया गुंजा. महोत्सव में बालोद जिला के 06 बुलबुल के साथ प्रभारी फ्लॉक लीडर बसंती पिकेश्वर शामिल हुई थी। नेशनल लेवल कब बुलबुल महोत्सव में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए पांच दिवसीय कब बुलबुल बरौनी बिहार में शामिल हुए थे। बच्चों को खेल खेल में शिक्षा देते हुए सर्वांगीण विकास कर रहे हैं। बसंती ने इस तरह सोरली स्कूल के जरिए बालोद जिले के लोहारा विकासखंड को कब बुलबुल गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई । प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन उनके द्वारा संबलपुर स्कूल में भी करवाया जाता है।

ये प्रमुख सम्मान भी उन्हें हो चुके प्राप्त

अक्षर सैनिक सम्मान,मातोश्री रमाबाई सम्मान, रत्न डॉ. अम्बेडकर सम्मान,शिक्षक सम्मान निखिल शिखर सम्मान, गैंदसिंह सम्मान, शिक्षक रत्न आवार्ड,ज्योतिबा फुले आइडल शिक्षक सम्मान, सवित्री फुले नेशनल शिक्षक अवार्ड, मिनीमाता महिला सशक्तिकरण अवार्ड, राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान शिकसा विशिष्ट सेवा सम्मान, कोरोना वारियर्स सम्मान प्राप्त हुए हैं ।

इन पदों में भी रह चुकी बसंती, निभा चुकी बेहतर दायित्व

शिक्षक बनने से पहले वे 1999 से 2004 तक, जिला पंचायत सदस्य दुर्ग भी रहीं। इसके अलावा जिला साक्षरता समिति दुर्ग सदस्य,नेहरू युवा केन्द्र जिला दुर्ग, सदस्य,साक्षरता अनुदेशक एवं प्रेरक, दीदी बैंक अध्यक्ष,स्वास्थ्य मितानीन कार्यक्रम जिला स्रोत समन्वयक, जिला मास्टर ट्रेनर, मितानीन कार्यक्रम,ब्लॉक प्रशिक्षक, सर्व शिक्षा अभियान डौण्डी लोहारा के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। वे केन्द्रिय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा समाज कर्मचारी प्रकोष्ट पद पर भी रहीं। आदिवासी अखिल भारतीय विकास परिषद तहसील उपाध्यक्ष, आदिवासी अखिल भारतीय विकास परिषद प्रदेश कार्य सदस्य, आदिवासी भारतीय हल्बा समाज ब्लॉक उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय हलबा समाज केन्द्रीय प्रतिनिधि,अखिल भारतीय हल्बा समाज कर्म प्रकोष्ठ कोषाध्यक्ष,अ.भ. हल्बा समाज महिला जिलाध्यक्ष, जिला बालोद भी रह चुकी।महिलाओं को शिक्षित करना,अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास,दहेज प्रताड़ना , बाल विवाह पर रोक लगाना और परिवार नियोजन कार्यक्रम को बढ़ावा देना,महिला उत्थान हेतु प्रेरित करना उनकी प्राथमिकता रही है।

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