मैं प्रतिभा त्रिपाठी आज इस शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर उन सभी शिक्षकों का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहती हूं ,जिन्होंने मुझे इस योग्य बनाया कि आज मैं बाकी बच्चों को शिक्षा प्रदान कर खुद अपना बचपन जी पा रही हूं, मैं अगर अपनी बात कहूं तो मेरे शिक्षा की शुरुआत सरस्वती शिशु मंदिर बुढार जिला- शहडोल (मध्य प्रदेश) से हुई। मैंने वहां उदय कक्षा से लेकर 12वीं तक की कक्षा का सफर तय किया।जीवन में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि शिक्षक न केवल हमें पुस्तकीय ज्ञान देते हैं, बल्कि जीवन में आने वाले हर उतार चढ़ाव के बारे में हमें अवगत कराते हैं। मैं इस शिक्षक दिवस पर अपने इस आलेख के माध्यम से सरस्वती विद्यालय के समस्त आचार्य व दीदी जी का धन्यवाद करना चाहती हूं ,जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं खुद शिक्षा जगत में अपना समय देकर बच्चों को उस योग्य बनाने का प्रयास कर रही हूं ,कि बच्चे भी स्वयं ज्ञानार्जन कर अपने जीवन में एक अच्छी मुकाम को हासिल करें, और सिर्फ पुस्तक की ज्ञान ही में बच्चे ना रह जाए बल्कि जीवन जीने की कला, अनुशासन जो हमारे जीवन में महती भूमिका रखता है, उसके बारे में भी मैं उन सभी बच्चों को सिखा पाऊं। मेरे जीवन में शिक्षक का महत्व उस दीपक की तरह है जो अपनी रोशनी से पूरे विश्व को प्रकाशमय बनाता है, शिक्षक वह बाती है ,जो खुद जलकर भी अपने आसपास के क्षेत्र को प्रकाशमान करता है। शिक्षक अपने छात्रों को सपने देखने व उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देते हैं। वह उनके सपनों को पंख देते हैं, जिससे वह अपने कठिन परिश्रम से अपनी राह को पकड़ सके। माता-पिता तो हमें सिर्फ जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक हमें जीवन की सही दिशा व सही राह पर चलना सीखते हैं।अनुशासन ,तर्क -वितर्क, विचार विमर्श इन चीजों से अवगत कराते हैं। शिक्षक हमारे जीवन की वह सीढ़ी है, जिससे हम निरंतर नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। हमारे व्यवहार आचरण में हमारे शिक्षक व माता-पिता की झलक दिखाई देती है। इस शिक्षक दिवस पर मेरे इन्हीं शब्दों से मेरे समस्त शिक्षकों को शत-शत प्रणाम व वंदन ….।
प्रतिभा त्रिपाठी
शिक्षक
गुरु बालक दास शा पूर्व मा शाला गोडेला, गुन्डरदेही,जिला बालोद
