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एक शिक्षक ऐसे : जिस स्कूल में भी जाते हैं ये “कौशल सर” बच्चों के चहेते बन जाते हैं…

वनांचल की बेटियों में शिक्षा के प्रसार में करते हैं काम, सांस्कृतिक क्षेत्र में भी है इनका विशेष नाम

डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। गुण्डरदेही ब्लॉक के मिडिल स्कूल में पदस्थ उच्च वर्ग शिक्षक तामेश्वर प्रसाद कौशल बच्चों के चहेते गुरु जी हैं। इसके पहले वे बालोद ब्लाक के जामगांव स्कूल में पदस्थ रहे। वे जहां भी जाते हैं बच्चों के चहेते बन जाते हैं। युक्तियुक्तकरण के तहत उनकी पदस्थापना डोंगीतराई मिडिल स्कूल में हुई है। चंद दिनों में ही वे बच्चों के प्रिय गुरु जी बन गए हैं। उन्हें बच्चे काफी पसंद करते हैं और कौशल सर भी बच्चों को पसंद करते हैं। खासकर कक्षा आठवीं के बच्चों को वे पढ़ाते हैं, वे उनके कक्षा शिक्षक हैं। शिक्षक कौशल सर का कहना है कि बच्चों से एक लगाव सा होता है । उन्हें अपने बच्चों की तरह देखता हूं और उनकी शिक्षा में मदद के साथ साथ अन्य समस्याओं को दूर करने का भी प्रयास करता हूं। बच्चे मुझे अपने व्यक्तिगत जानकारी भी साझा करते हैं। मुझसे सलाह लेते हैं। यह देख मुझे अच्छा लगता है कि मैं उनके कुछ काम आ रहा हूं। माता-पिता से ज्यादा बच्चे अपने गुरुजनों से जुड़े रहते हैं। वे अपने आप को सौभाग्यशाली मानते हैं कि इस जन्म में एक शिक्षक हैं। शिक्षक बच्चों की जिंदगी सवार देते हैं और यह काम करने का मौका उन्हें मिला है। वे अपनी ओर से पूरा प्रयास करते हैं कि बच्चों को जो पढ़ा रहे हैं वह पूरा अच्छी तरह से समझ आए। पढ़ाई का बोझ उनके सिर पर बिल्कुल ना आए और खेल-खेल में मनोरंजन के साथ पाठ्यक्रम पूरा हो जाए।

बच्चों ने मनाया शिक्षक दिवस

स्कूल में बच्चों द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन कर शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस दौरान कक्षा में केक भी काटे गए। बच्चों ने अपने गुरु जनों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया।इस दौरान प्रधानपाठक माध्यमिक शाला येमन लाल धनकर, तीजू राम देशलहरे, प्रधान पाठक प्रा शा अशोक साहू, कुलेश्वर चन्द्राकर आदि मौजूद थे।इस आयोजन के लिए शिक्षक तामेश्वर प्रसाद कौशल ने बच्चों का हृदय से आभार जताया है। साथ ही उन्होंने बच्चों से इसी तरह आगे भी गुरु शिष्य की परंपरा को बनाए रखने की बात कही।

सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी हैं सक्रिय

शिक्षक तामेश्वर प्रसाद कौशल शिक्षा के साथ सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी विशेष कार्य कर रहे हैं। बढ़ती उम्र में भी उनकी कर्मठता, काम और दायित्व के प्रति तत्परता देखने को मिलती है। वे पूरी स्फूर्ति के साथ और लगन के साथ अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में लगे हुए हैं। श्री कौशल भोला पठार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। मंदिर के जरिए जुड़कर वे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को भी बढ़ावा देते हैं। समय-समय पर भोलापठार में विविध आयोजन करते रहते हैं और क्षेत्र की प्रतिभाओं को तराश कर उन्हें उचित मंचों पर सम्मान दिलाते हैं। एक शिक्षक होने के साथ-साथ में समाज सेवा, धार्मिक क्षेत्र और सामाजिक क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अपने महार समाज में वे जिला सचिव के पद पर भी सुशोभित कर रहें है और समाज सेवा में भी लगे हुए हैं।

गरीब बच्चों की पढ़ाई में करते हैं मदद

उनका मूल निवास झलमला है, जहां से लगे सिवनी क्षेत्र के सपेरा बस्ती के बच्चों को शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए भी प्रयास कर रहें हैं। साथ ही गरीब तबके के बच्चों को भी पढ़ाई या अन्य तरह की जरूरत पर आर्थिक मदद भी करते हैं। वनांचल क्षेत्र तालगांव व आसपास के इलाकों में भी ये गुरुजी समाज सेवक के रूप में जाने जाते हैं और जरूरतमंदों की समय-समय पर मदद करते आ रहे हैं।

छोटे बच्चों से स्नेह करते हैं ज्यादा

छोटे बच्चों से उनका विशेष लगाव देखते ही बनता है। जिस गांव में भी पढ़ाते हैं इसके अलावा आसपास के गांव में जब भी वे जाते हैं तो छोटे बच्चे उनके पास आ जाते हैं। उनसे विशेष लगाव के साथ मिलते हैं।बेटियों को बढ़ावा देने के लिए भी उनके द्वारा लगभग 4 साल से पहल जारी है ।

बेटियों की शादी 21 वर्ष करवाने के लिए चला रहे वनांचल में जागरूकता अभियान

तामेश्वर कौशल एक अच्छे शिक्षक के साथ-साथ समाज सेवा में भी अग्रणी है। तो साथ ही उनकी बुलंद आवाज के चलते उन्हें “रेडियो वाले गुरु जी” के नाम से एक नई पहचान मिली है। वर्षों से वे एक राजनांदगांव के सांस्कृतिक संगठन से भी जुड़ कर विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं। वर्तमान में सांस्कृतिक लोक कला मंच धरोहर संस्कार धानी राजनादगांव के मंच संचालन का कार्य विगत 15 वर्षो से कर रहे हैं। गायकी की बात हो चाहे मंच संचालन में वे हमेशा आगे रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा तत्पर रहे हैं। तो वही वनांचल क्षेत्र में लोगों को खासतौर से बेटियों की शादी की सही उम्र को लेकर जागरूक भी करते हैं। बेटियों की शादी 21 वर्ष में हो इसके लिए वे वनांचल क्षेत्र में “लाडली की लड़ाई, शादी बाद में, पहले पढ़ाई” नाम का अभियान भी चला रहे हैं। तामेश्वर कौशल का मानना है कि वनांचल जहां शिक्षा का अभाव देखा जाता है ऐसे जगहों पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को एक सकारात्मक तरीके से प्रचारित करने की जरूरत होती है। जिसमें वे अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि वनांचल में आज भी लड़कियां कम उम्र में ब्याही जाती हैं। कई बार जल्दी शादी होने की वजह से बेटियों की आकांक्षाएं दबी रह जाती है और वे कुछ नहीं कर पाती और उनकी शादी हो जाती है। कई प्रतिभाशाली बच्चे होते हैं जो आगे पढ़ नहीं पाते। ऐसे में वे वनांचल में बेटियों और पालकों को भी जागरूक करने का प्रयास कर रहें हैं और उनके जरिए प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखवाकर कर उनकी पीड़ा व उनके सपनों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अपनी तरह का एक अनूठा प्रयास है।

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