नाड़ी वैद्य गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख पहुंचे थे धमतरी जिला भ्रमण पर, देखा महानदी का वास्तविक उद्गम स्थल, कर्णेश्वर महादेव मंदिर का भी जाना इतिहास, की पूजा अर्चना



डीबी डिजिटल मीडिया बालोद/ धमतरी। बालोद जिले के विख्यात समाजसेवी नाड़ी वैद्य गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख शुक्रवार को धमतरी जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान वे धमतरी जिले के कुछ ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक जगह पर भी पहुंचे। इस क्रम में वे सर्वप्रथम सिहावा पहुंचते ही जमीन से प्रकट हुई मां शीतला मंदिर के दर्शन कर राज्य,देश और लोगों की खुशहाली की कामना की। इसके बाद वे महानदी के वास्तविक उद्गम स्थल गणेश घाट पहुंचे और वहां के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को करीब से जाना। इसके उपरांत नजदीक में ही स्थित सिहावा के ही कर्णेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे। वहां के पुजारी से मिलकर मंदिर के इतिहास, विशेषता और होने वाले आयोजनों की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने कर्णेश्वर महादेव में स्थित 12वीं शताब्दी के शिवलिंग में पूजा अर्चना भी की।

आप भी जानिए उन जगहों के बारे में

1.गणेश घाट सिहावा

महानदी का उद्गम स्थल धमतरी जिले में स्थित सिहावा पर्वत श्रेणी है, और गणेश घाट इसी सिहावा पर्वत के पास का वह स्थान है जहाँ से नदी की धारा पहाड़ को चीरते हुए निकलती है और एक कुंड से होकर प्रवाहित होती है, जिसे महानदी का उद्गम स्थल माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि महानदी की उत्पत्ति श्रृंगी ऋषि के कमंडल से हुए जल के गिरने के कारण हुई थी. उसी से संबंधित गणेश घाट वह स्थान है, जहां पर्वत के आंतरिक भागों से होते हुए नदी की धारा जब धरातल पर आती है, तो यह गणेश घाट के पास से निकलती है. गणेश घाट के पास ही महानदी कुंड है, जो नदी के उद्गम के बाद उसके प्रवाह का पहला रूप है, और इसी जगह से वह नदी के रूप में दिखाई देती है. वहीं पहाड़ को चीरते हुए निकलने के कारण महानदी को ‘चित्रोत्पला महानदी’ के नाम से भी जाना जाता है.

  1. कर्णेश्वर महादेव

कर्णेश्वर महादेव मंदिर धमतरी जिले के सिहावा में स्थित एक प्राचीन मंदिर समूह है, जिसे 12वीं शताब्दी में सोमवंशी राजा कर्णदेव ने बनवाया था. यह मंदिर महानदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और इस परिसर में भगवान शिव को समर्पित कर्णेश्वर शिव मंदिर के साथ-साथ अन्य मंदिर भी शामिल हैं. यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।ये मंदिर सिहावा क्षेत्र के देउरपारा गांव में स्थित है. यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि 12वीं शताब्दी के पांच मंदिरों का एक समूह है. इस मंदिर परिसर का निर्माण कांकेर के सोमवंशी राजा कर्णदेव ने किया था. कर्णेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ में श्रद्धा और आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के दिनों में भक्तों की भारी भीड़ यहाँ उमड़ती है.

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