डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बालोद जिला मुख्यालय में बैठे एन एच एम स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया और कहा गया कि उनकी 10 सूत्रीय मांगों को जायज़ करार देते हुए जल्द ही आंदोलन में उनके साथ शामिल होने और सरकार के खिलाफ उनकी मांगों को पूरी करने के लिए लड़ने के लिए तैयार है। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उईके ने संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को जायज़ ठहराया और कहा कि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र में संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की बात कह कर जीत तो हासिल कर ली मगर सरकार बनने के बाद इन्हीं संविदा कर्मचारियों से दूरी बना लिया। पांच दिनों से जब संविदा कर्मचारी आंदोलन पर बैठे है शासन प्रशासन कोई भी इनकी बातों को सुनने के लिए सामने नहीं आ रहा। तेज बारिश में भी ये संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने में बैठे हुए है। आज हम देख रहे है कि आम जनता से लेकर चाहे वो नियमित कर्मचारी हो या संविदा कर्मचारी किसी न किसी मांगों को लेकर आज सड़क पर उतर आई है। सरकार का ऐसा तानाशाही रवैया शायद हमने कभी देखा हो, सरकार से कोई भी वर्ग आज खुश नहीं, कोई भी विभाग जब धरना प्रदर्शन में उतर जाती है तो सरकारी काम काज चरमरा जाती है और इसका प्रभाव सीधा आम जनता के ऊपर पड़ता है। एन एच एम स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन में जाने से जिला स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था चरमरा गई है। बारिश में कई प्रकार की बीमारी जन्म लेती और ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के आंदोलन में जाने से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा, जैसे सरकार को आम जनता की कोई चिंता ही नहीं है। वहीं छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने कहा कि मोदी की गारंटी वाली बीजेपी सरकार अब पूरी तरह फिसड्डी हो चुकी है और ये सरकार कुछ भी नहीं कर पा रही आम जनता से लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी तक हर वर्ग आज आंदोलन के माध्यम से सरकार के गलत नीतियों के खिलाफ खड़ी है। सरकार ने स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ छल किया है। सरकार की वादा खिलाफी बर्दाश्त के बाहर है। सरकार स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, हर जिले में सिम्स खोलने,और हर ब्लॉक में डायलिसिस सेवा शुरू करने के लिए अपनी चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था लेकिन सत्ता में आते मोदी की गारंटी वाली बीजेपी सरकार ने आम जनता से जैसे नाता तोड़ कर केवल पूंजीपतियों और अडानी अंबानी से रिश्ता बना रखा है। एन एच एम स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों के 27% वेतन वृद्धि, मेडिकल अवकाश, की स्वीकृति मिलने पर भी इनको आदेश क्यों नहीं दिया जा रहा है ? कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और आलाधिकारियों से मिलने के बाद भी इनकी बातों को अनसुना किया रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के साथ दो दो उपमुख्यमंत्री होने बाद भी राज्य के कर्मचारियों और जनता का ऐसा हाल है। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एन एच एम स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देती है।
एन एच एम संविदा कर्मचारियों बालोद के हड़ताल को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/ छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने किया समर्थन
