DAILY BALOD NEWS

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कला उत्सव में सेजेस खलारी के बाल कलाकारों ने मारी बाजी

बालोद। विकासखंड शालेय कला उत्सव 2025 का आयोजन बालोद जिला के आदिवासी विकासखंड डौंडी के सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दल्लीराजहरा के सभागार में विकासखंड शिक्षा अधिकारी रोहित कुमार सिन्हा के दिशा निर्देशन में संपन्न हुई। कार्यक्रम के प्रभारी एवं नोडल अधिकारी धर्मेंद्र कुमार श्रवण राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता सेजेस खलारी ने अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए बखूबी से निभाने का प्रयास किया गया जो कि सराहनीय व अनुपम कदम रहा। उन्होंने यह बताया कि कला उत्सव स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानने, उसे पोषित करने और शिक्षा में कला को बढ़ावा देने की उद्देश्य से वर्ष 2015 से कला उत्सव का आयोजन कर रहा है और यह हर वर्ष आयोजित होती है और विकासखंड स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक कला उत्सव की संरचना तैयार की जाती है जिसमें संज्ञानात्मक विषय के साथ-साथ सह-संज्ञानात्मक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जाता है । कक्षा नवमी से कक्षा 12 वीं तक के बच्चों के द्वारा विभिन्न माध्यमिक शालाओं के बाल कलाकारों के प्रतिभाओं को सँवारने का यह उचित प्लेटफार्म है जिसमें कला प्रस्तुतियांँ एवं प्रदर्शनियांँ सम्मिलित होती हैं।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी सिन्हा के द्वारा मंच पर उपस्थित सभी विधा के निर्णायक दल, प्रतिभाशाली उत्साहित प्रतिभागी बच्चे एवं सभागार में उपस्थित दर्शक दीर्घा बांधुओ को शुभकामनाएंँ एवं बधाइयांँ संप्रेषित करते हुए कहा कि कला उत्सव बच्चों की प्रतिभाओं को आकलन करने का एक बहुत अच्छा मौका है और उसे इस सुनहरा मौका पर अपनी प्रतिभाओं को जीवन में आत्मसात करते हुए एक अच्छा कलाकार के साथ-साथ अभिव्यक्ति कौशल में अभिवृद्धि करने का साधन है ‌। ऐसे अवसर पर विकासखंड से राष्ट्रीय स्तर तक अपने कला प्रदर्शन के बल पर अपने माता-पिता, अपने स्कूल, जिला और राज्य स्तर तक नाम रोशन करने का नसीहत दी गई । स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा बच्चों की कला को पहचान कर उसके भावों को उकेरने और शिक्षा में कला को बढ़ावा देने की उद्देश्य से विशेष कर समग्र शिक्षा द्वारा यह कार्यक्रम पारंपरिक लोक कला एवं शास्त्रीय कला की विभिन्न शैलियों पर केंद्रित होता है उसको सँवारने हेतु निर्देशित किया गया।

फिर नोडल अधिकारी धर्मेंद्र कुमार श्रवण राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता के द्वारा 12 विधाओं पर केंद्रित कार्यक्रम के निर्णायक दलों का स्वागत वंदन कर मूल्यांकन प्रपत्र फाइल सौंपा गया और पारदर्शिता पूर्वक भूमिका निभाने हेतु निर्देशित करते हुए अपने दायित्वों पर खरा उतरने हेतु दिशा-निर्देश दिया गया। सभी ऊर्जित बाल कलाकार अपने विधाओं का प्रदर्शन करने में सफलता हासिल किये।विकासखंड डौंडी से 11 विद्यालयों से आए हुए 60 बाल बाल कलाकारों के द्वारा कला की प्रस्तुतियाँ एवं प्रदर्शनी बखूबी से निर्वहन करने में कामयाब रहे और जिसका बेहतर से बेहतर उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा निर्णायक दलों के द्वारा पारदर्शिता से निर्णय लिया गया । विकासखंड स्तर में जो सर्वोत्कृष्ट अंक अर्जित किये वहीं प्रतिभागी मेहनत कर प्रथम स्थान पर रहे वहीं बच्चे जिला स्तरीय कला उत्सव बालोद में 8 अगस्त 2025 को होने वाली प्रतियोगिता कार्यक्रम में शिरकत करेंगे और अपने विद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

प्रथम स्थान की शिखर को छूने वाले ऊर्जावान व प्रतिभाशाली छात्रगण का प्रस्तुतिकरण बेहतरीन

आदिवासी वनांचल ग्राम में स्थित
सेजेस खलारी के बच्चों ने तीन विधाओं में बाजी मारी छत्तीसगढ़ के संस्कृति और संवर्धन के खातिर यहांँ के लोकगीत व लोक नृत्य में निखार लाने हेतु खलारी के बाल कलाकारों ने लोक नृत्य के माध्यम से बस्तर आदिवासी अंचल के नृत्य को बेहतर ढंग से मंच पर प्रदर्शन कर सभी दर्शक दीर्घा बंधुओ को मंत्रमुग्ध करते हुए तालियों की गूंजायमान भरने में कामयाब हुए और साथ ही साथ केंद्र शासन की योजनाओं को सफल बनाने के लिए एक पेड़ मांँ के नाम जैसे शीर्षक को लेकर लोगों में जन जागरूकता लाने का नाटकीय मंच के माध्यम से प्रयास किया गया क्योंकि कहा गया है कि कहते हैं वेद पुराण एक वृक्ष दस पुत्र समान.. यह चरितार्थ निश्चित रूप से हमारे जीवन में अवतरित होता है बिना पेड़ का यह जीवन असंभव है क्योंकि पेड़ ही हमको सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं और हम लोभी मानव स्वार्थ पूर्ति के लिए उनका सदुपयोग करते हैं लेकिन कल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करना और पेड़ लगाना हम सब का पूर्ण दायित्व बनता है तभी हम पर्यावरण को संरक्षित व सुरक्षित कर हमें पेड़ लगाना जरूरी है ताकि आने वाले भविष्य जल,वायु एवं पेड़ से प्राप्त होने वाले विभिन्न सामग्रियों को प्राप्त कर सके अब अपने जीवन को संयमित ढंग से जीने में कामयाबी दिखा सके ऐसे ही कहानी वचन के माध्यम से बहुत ही बेहतरीन प्रदर्शन मंच पर किया गया इस तरह से पारम्परिक लोकनृत्य में कक्षा नवमीं से कु. कासनी/दशरथ कुमार, हिनेश्वरी/उधो राम, जीया /नामदेव एवं जी प्रिया/नामदेव गंगराले नाटक (एकांकी) में एक पेड़ मांँ के नाम शीर्षक लेकर कक्षा नवमी के छात्र कु.कल्पना/हेमंत देवांगन, हिमांशी/रमेश कुमार, ओजस्वी/खिलावन, दामिनी/संतोष कुमार एवं पारम्परिक कहानी वाचन त्यागी पेड़ शीर्षक लेकर कक्षा दसवीं से कु.तुलसी खरे/संजय खरे सहित सभी बाल कलाकारों ने सर्वोच्च अंक बटोरते हुए जिला स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता बालोद प्रदर्शन करेंगे।विकासखंड स्तरीय शालेय कला उत्सव में प्रथम स्थान हासिल कर स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खलारी को गौरवान्वित करने में सफलीभूत हुए। धर्मेंद्र कुमार श्रवण व्याख्याता के नेतृत्व एवं उनके दिशा निर्देशन में बच्चों की कला को संँवारने का प्रयास किया और मंच को साज-सज्जा एवं प्रतिभागी बच्चों के प्रति समर्पण का भाव रखने वाली श्रवण जी ने बखूबी से अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और उसी के परिणाम स्वरूप बच्चों ने प्लेटफार्म पर अपने अभिव्यक्ति कौशल प्रदर्शन करने में सफल रहा। सहयोगी शिक्षक जी.एस. कोर्राम हिंदी प्रकोष्ठ व्याख्याता एवं संजय कुमार खरे संस्कृताचार्य ने भी सहयोग प्रदान कर बच्चों को नसीहत दिया गया।बच्चों के इस नेक उपलब्धि पर संस्था के संस्था प्रमुख श्रीमती एस जानसन , वरिष्ठ व्याख्याता भूमिका पाटिल, खूब चंद वर्मा सरोज सिंह एवं समस्त शिक्षकवृंद परिवार, शाला विकास समिति के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्यगण, शाला परिवार के सभी छात्रगण बाल कलाकारों को उसके इस उपलब्धि पर हर्षित होकर विजय बाल कलाकारों को शुभकामनाएं संप्रेषित किये है।

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