हरेली विशेष: शहर से लेकर गांव तक फैलाई जा रही है हरियाली, स्वच्छ धरा वेलफेयर समिति दे रही पर्यावरण के संरक्षण में विशेष योगदान



बालोद। छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार के रूप में मनाया जाने वाला हरेली, जिसे सावन अमावस्या के अवसर पर मनाया जाता है। यह अवसर हरियाली का स्वागत करने, किसानों को अपनी अच्छी उपज के लिए पूजा अर्चना करने, साथ ही अपने कृषि संसाधनों के प्रति आभार व्यक्त करने का त्यौहार होता है । हरियाली यानी पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए एक विशेष प्रयास इन दिनों छत्तीसगढ़ के कई जिलों में स्वच्छ धरा वेलफेयर समिति कर रही है। जो न सिर्फ शहर बल्कि गांव में पहुंच कर हरियाली बिखरने, पौधारोपण करने और उन हरियाली को सुरक्षित करने का सफल प्रयास करती नजर आ रही है। गांव से लेकर शहर तक पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष काम करने वाले स्वच्छ धरा समिति के द्वारा बालोद जिले के अलावा दुर्ग भिला के विभिन्न गांव में अलग-अलग जगह पौधों रोपित किए गए हैं। उनका यह प्रयास अभी से नहीं बल्कि विगत करीब डेढ़ साल से चल रहा है। यह समिति लगातार जहां पौधा लगाने में जुटी है साथ ही उन जगहों की निगरानी भी करती है। पौधे के आसपास अगर कूड़ा करकट या अवांछित घास फूस उग जाए तो उनकी बाकायदा सफाई भी करते हैं । बिना किसी संकोच के नौकरी पेशा वाले लोग भी इस अभियान से जुड़े हैं और वह साफ-सफाई में और पर्यावरण बचाने के लिए जुटे रहते हैं । उन्हें ऐसा करते देखकर कई बार आम जनता उन लोगों को सफाई कर्मी तक समझ जाते हैं। जब लोग उन्हें पूछते हैं कि कहां से हो, तब वे बताते हैं कि हम समाज सेवी है और लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करने के लिए कार्य कर रहे हैं। आज हरेली पर हम इस समिति की शुरुआत अब तक के सफर के बारे में जानते हुए उनके प्रमुख संस्थापक और संरक्षक से बात की ताकि लोगों के लिए उनका प्रयास प्रेरणादायक बना रहे और प्रत्येक जिले में ज्यादा से ज्यादा लोग हरियाली को सुरक्षित करने के लिए प्रयास कर सके। शासन द्वारा भले ही इस बार एक पेड़ मां के नाम अभियान के जरिए लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पर स्वच्छ धरा वेलफेयर समिति उससे पहले ही इस काम में जुटी हुई है और ज्यादा से ज्यादा संख्या में और समुचित सावधानी के साथ पौधे रोपे जा रहे हैं। जिम्मेदारी पूर्वक पौधा रोपने का काम यह समिति कर रही है, ना कि सिर्फ फोटो सेशन किया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण से जोड़ने के लिए अहम भूमिका यह समिति निभा रही है। बालोद सहित अन्य स्थानों पर पौधे रोपे गए हैं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिलों में इस समिति के सदस्य सक्रिय हैं। जो अपने-अपने स्तर पर पर्यावरण बचाने के लिए प्रयास करते रहते हैं ।

ऐसे हुई है शुरुआत

समिति का गठन 17 मार्च 2023 को भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर हुआ। जिसके संरक्षक बिरेंद्र कुमार देशमुख एवं संस्थापक नवनीत कुमार हरदेल हैं। इसके पश्चात् संरक्षक बिरेंद्र कुमार देशमुख एवं सदस्यों के कहने एवं सहयोग पर कार्यकारिणी गठन के साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश पंजीयन 22जुलाई 2024 को हुआ। भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर स्वच्छता के साथ साथ फलदार, छायादार, फूल के पौधारोपण एवं भिलाई शहर के आसपास मंदिरों में स्वच्छता एवं पौधारोपण कर जागरूकता तथा पूर्व किसी पर्यावरण प्रेमी द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल करते हुए अभियान किए। लोगों को पौधे भी वितरण किए ताकि वे स्वयं लगाकर स्वयं देखभाल करते रहें। आगे हरा भरा, स्वच्छ धरा के लिए जो भी आवश्यकता होगी उसे समिति अपने श्रमदान के साथ पूरा करेगी । भविष्य में औषधीय पौधे का पौधारोपण बड़ी संख्या में करने का विचार है। इस समिति के संरक्षक नाड़ी वैद्य गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख और संस्थापक एवं प्रदेश अध्यक्ष नवनीत हरदेल ने बताया कि
छत्तीसगढ़ के हर जिले में हमारी समिति के सदस्य रहते हैं। वे भी अपने अपने स्तर से हरा भरा, स्वच्छ धरा के लिए लोगों को स्वयं जागरुक होकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। हम भी समय मिलने पर अन्य जिलों में जागरूकता अभियान करते रहते हैं।

ये काम भी करती है समिति

समिति द्वारा स्वच्छता, पौधारोपण, नशा मुक्ति ,जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, पालीथिन का बहिष्कार , समिति के सदस्यों द्वारा समय-समय पर रक्तदान , समय समय पर समिति के सदस्यों द्वारा कथा पंडाल पर नाश्ता की व्यवस्था आदि विशेष कार्य करती है। हरियाली संरक्षण को लेकर हम सुरक्षा घेरे में ही पौधारोपण करते हैं और उसे जिस स्थान में लगाया जाता वहां के लोगों को इसकी देखभाल के लिए यदि वहां हमारा सदस्य है तो वह करता है या वहां के रहवासी को इसके लिए कहा जाता है। जो पौधे से पेड़ का सफर तय करते हैं।

लोगों को जागरूक करने ये कदम उठाए हैं।

लोगों को जागरूक करने के लिए समिति जगह-जगह पौधा रोपण, स्वच्छता अभियान, नशा मुक्ति अभियान, जल संरक्षण, रक्तदान अभियान स्वयं चलाकर लोगों को जागरूक करती है। बैनर, पोस्टर, गीत, कविता,नारे के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते हैं। इस टीम में लगभग 500 लोग शामिल हैं। ये सभी अपने अपने समय के अनुसार कार्य करते रहते हैं। समिति के साथ साथ सभी मीडिया वालों का सबसे बड़ा रोल जागरूकता में योगदान रहता है, जो कि समिति द्वारा किए गए जागरूकता अभियान को समाचार के माध्यम से दूर दूर, कोने कोने में लोगों तक पहुंचाती है, मीडिया को भी संस्थान अपनी समिति के सदस्यों के रूप में देखती है। संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष नवनीत कुमार हरदेल लगभग 2019 एवं कोरोना काल के समय से इस अभियान को करते आ रहे हैं। इनके जुझारूपन को देखकर इनसे प्रभावित होकर इस अभियान से लोग जुड़कर जुझारू होकर कार्य कर रहे हैं। टीम के इस जुझारू निःस्वार्थ सेवा से लोग भी अपने अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

कितने पौधे लगा चुके हैं इसकी नहीं करते गिनती, बस उन्हें सुरक्षित रखना जरूरी समझते हैं

संरक्षक बिरेंद्र देशमुख ने कहा कि अब तक कितने पौधे लगाए जा चुके हैं हम गिनती नहीं करते हैं । बस जहां पौधे की उचित देखभाल हो वहां लगा देते हैं या किसी ने कहा यहां लगा दीजिए हम देखभाल करेंगे तो हम पौधारोपण कर देते हैं। हम अधिकतर ऐसे पौधे का रोपण करते हैं जिसे जानवर खाते नहीं हैं या नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। जिससे हमें देखभाल में समय की बचत होती है। क्योंकि हम हर जगह तो जा नहीं सकते।इस अभियान में नाड़ी वैद्य बिरेंद्र कुमार देशमुख,नवनीत कुमार हरदेल, आशीष कुमार दिल्लीवार, सुरेंद्र साहू, श्रीमती थनेश्वरी हरदेल, कार्तिक चंद्राकर, चितरंजन देशमुख,डालेंद्र देशमुख, निकिता जयेश शिंगणे, दिनेश देशमुख,भानु शंकर बेलचंदन, भानु साहू, गोपाल चोपकर, नरेंद्र बंछोर, प्रशांत देशमुख, टीनल हरदेल, सरोज, श्वेता जैन, डॉ हामेश्वर देशमुख, हेमेंद्र साहू आदि का विशेष योगदान रहता है।

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