सुप्रीत शर्मा,बालोद । आज 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम बालोद के एक ऐसे युवा धीरज शर्मा की बात कर रहे हैं जिन्होंने योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया है। 2009 से योग स्वयं सीखने और दूसरों को सीखाने का सिलसिला शुरू करने वाली धीरज शर्मा को आखिर उनके धैर्य का फल मिल ही गया है। उन्हें हाल ही में लाजपत भवन ऑडिटोरियम दिल्ली में 11वे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय योग शिक्षक महा संघ द्वारा टॉप 21 इंडियन इंस्पायरिंग योगिश अवार्ड तथा आदि योग भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान धीरज शर्मा को योग के क्षेत्र में वर्षों की सेवा और योगदान के लिए प्रदान किया गया है। वे पिछले 15 साल से समाज के हर क्षेत्र के लोगों को योग, प्राणायाम, ध्यान आदि सीखा रहे हैं। 2009 में जब लोगों को योग के बारे में उतनी खास जानकारी नहीं होती थी इस पर ध्यान नहीं देते थे उस दौर में आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़कर धीरज ने अपने योग करियर की शुरुआत की और आज वे कई विशेष प्रोग्राम चला कर विभिन्न वर्ग के लोगों को योग से जोड़कर उन्हें निरोगी बना रहे हैं। खुद तो अपने जीवन में उन्होंने योग को ढाला ही है, दूसरों के जीवन में भी वे योग से बदलाव ला रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व दिल्ली में उन्हें सम्मानित किए जाने पर पूरे बालोद शहर सहित जिले वासी भी गदगद है और इसे योग के क्षेत्र में बालोद जिले की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
लगातार 1641 बार भुजंग आसान कर बना चुके हैं वर्ल्ड रिकॉर्ड
पिछले साल ही धीरज शर्मा ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक घंटे में 1641 भुजंगासन कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इसका सर्टिफिकेट व मेडल उन्हें 8 मई 2024 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदान किया था। यह रिकॉर्ड धीरज शर्मा ने 27 फरवरी को गुरु ग्रेस योगा एंड वैलनेस स्टूडियो बालोद में बनाया था। गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड की छत्तीसगढ़ हेड सोनल राजेश शर्मा ऑब्जर्वर के रूप मौजूद थीं। उनके वीडियो दिल्ली हेड ऑफिस भेजे गए। वहां से अप्रूवल के बाद दिल्ली से सर्टिफिकेट व मेडल रायपुर भेजा गया। यह रिकॉर्ड सन 2018 में राजस्थान के एक युवक ने बनाया था। उसने 60 मिनट्स में 849 बार भुजंगासन किया था। जिसे धीरज शर्मा ने सिर्फ 29.30 मिनट्स में तोड़ दिया और 60 मिनट्स के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए 1641 बार भुजंगासन किया, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है।
विशेष योग शिक्षक के रूप में मिली पहचान
बालोद नगर के निवासी 45 वर्षीय धीरज शर्मा आर्ट ऑफ लिविंग के योग शिक्षक है। उन्होंने खुद को निरोग जीवन में ढाला। अब खुद ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही जरिए जिले के अलावा देश व विदेश के लोगों को भी योग करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार 2009 में आर्ट ऑफ लिविंग से योग सीखा। फिर लोगों को सिखाना शुरू किया। जिले में ऑफलाइन व अन्य राज्य व विदेश के लोग ऑनलाइन योग सीखाते हैं। 12 हजार से ज्यादा लोग उनसे जुड़कर योग कर रहे हैं। योग से कई लोगों की बीमारी ठीक हो गई है। लोगों को योग से बोर न लगे, इसलिए अलग-अलग तरीके से योग करवाते है। सबसे ज्यादा डांसिंग योग व संगीत योग का रुझान है। वे छोटे बच्चों को भी योग सीखा रहे हैं। उन्होंने हर व्यक्ति से योग करने की अपील की है। योग के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं। धीरज शर्मा ने अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय अपने गुरु श्री रविशंकर को प्रदान किया है। उनका कहना है कि सब गुरु कृपा, बुजुर्गों का आशीर्वाद और मेरे योग विद्यार्थियों के प्रेम और विश्वास का प्रतिफल है। वे स्कूल, कॉलेज, कॉलोनी, जेल, आर्म्ड फोर्सेज के जवानों और ग्रामीणों को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। अब तक भारत के कई अलग-अलग शहरों के हजारों लोगों को योग का प्रशिक्षण दे चुके हैं। योग के प्रति उनके अथक परिश्रम, समर्पण और योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया जाता है। ताकि दूसरे भी उनसे प्रेरित हो।
