बालोद। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्थानीय पोस्ट ऑफिस में डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। डाक टिकट संग्राहक डॉ प्रदीप जैन ने बताया भारत की प्राचीन विधा योग ने विश्व में अपना प्रभाव स्थापित किया है। हजारों वर्ष प्राचीन स्थापत्य कला एवं मूर्ति कला में आध्यात्मिक योग के दर्शन होते हैं। भारत की अत्यंत प्राचीन विधा योग का प्रभाव आज धीरे-धीरे संपूर्ण विश्व में देखा जा रहा है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस 11 वी बार मनाया जा रहा है। योग की महत्ता को लेकर भारत के प्रयासों के चलते दुनिया भर के देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वीकारा और 21 जून 2015 में पहली बार इसे विश्व स्तर पर मनाया गया। इस वर्ष “एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य”की थीम के साथ पूरा विश्व योग दिवस मनायेगा। वैश्विक महामारी कोरोना ने विश्व पटल पर योग की महत्वता को प्रदर्शित किया है।सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए योग की महत्ता अब किसी से छिपी नहीं है। हमारे लिये अत्यंत गौरव का विषय है कि इस वर्ष योग से युवाओ को जोड़ने हेतु योगा अनप्लग्ड से उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। योग को अपने दैनिक दिनचर्या में शामिल करके हम अपने शारीरिक के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी तंदुरुस्त रख सकते है। प्रदीप जैन ने बताया भारतीय डाक विभाग द्वारा योग के विभिन्न मुद्राओं पर समय-समय पर कई डाक टिकट जारी किए हैं। वर्ष 1991 में 4 टिकटों का एक विशेष सेट जारी किया था जिसमें धनुरासन, उष्टासन, धनुरासन व उतीष्ट त्रिकोणासन की मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया । इसी प्रकार सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं को अलग-अलग 12 डाक टिकटों पर मुद्रित किया गया। टिकट 5 रूपए मूल्य वर्ग एवं 25 रूपए मूल्य वर्ग के हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पहली 21 जून 2015 को जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया गया तो भारतीय डाक विभाग द्वारा 5 रूपए मूल्य का एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया था। साथ ही योग दिवस के अवसर पर सन 2015 में 100 एवं 5 रुपये के सिक्के भी भारत सरकार द्वारा जारी किये गये थे। बालोद के वरिष्ठ चिकित्सक एवं डाक टिकट संग्राहक डॉ प्रदीप जैन ने योग पर जागरूकता हेतु स्थानीय पोस्ट ऑफ़िस में इन सामग्रियों को प्रदर्शित किया है।
11 वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य थीम पर हो रहा आयोजन, लोगों को प्रेरित करने डॉ प्रदीप जैन ने लगाई डॉक टिकट की प्रदर्शनी
