काऊंसिलिंग बहिष्कार के लिए जिला पंचायत के बाहर पांच घंटे डटे रहे जिले के शिक्षक, जमकर की नारेबाजी
दूसरे पहर अपनी नौकरी बचाने प्रशासन के प्रेशर में काउंसलिंग में शामिल होने पहुंच गए शिक्षक
बालोद। जिले में शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय आह्वान पर विसंगतिपूर्ण युक्तियुक्तकरण के विरोध व अन्य मांगों को लेकर आज सोमवार को काऊंसिलिंग बहिष्कार के लिए काऊंसिलिंग स्थल जिला पंचायत बालोद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई। सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक करीब 5 घंटे शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। शासन प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। विसंगतिपूर्ण युक्तियुक्तकरण व सेटअप 2008 के अनुसार युक्तियुक्तकरण नहीं करने से नाराज शिक्षकों ने सुबह 9 बजे से इकट्ठा होकर जिला पंचायत के सामने विरोध प्रदर्शन किया व काऊंसिलिंग बहिष्कार का ऐलान किया। विदित हो कि शिक्षक साझा मंच द्वारा चार सूत्रीय मांग विसंगति पूर्ण युक्तियुक्तकरण को निरस्त कर सेटअप 2008 का पालन करने,सोना साहू के प्रकरण के आधार पर क्रमोन्नति का जनरल आर्डर करने,प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व की सेवा गणना कर पुरानी पेंशन देने,पदोन्नति में बी.एड. /डी. एड. दोनों को मान्य करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन की जा रही है। जिला संचालक दिलीप साहू ने कहा कि विगत 28 मई को राजधानी के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर मंत्रालय घेराव के लिए आंदोलन किया गया था। फिर भी सरकार एवं विभाग द्वारा अब तक सकारात्मक निर्णय नहीं लेने के कारण जिला स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं अतिशेष शिक्षकों की जारी सूची में भारी विसंगति, दावा आपत्ति नहीं लिए जाने व रिक्त पदों की पहले से नहीं दिखाने पर भी शिक्षकों ने नाराजगी व्यक्त की। वही प्रदर्शन के दौरान शिक्षक साझा मंच के पदाधिकारियों को जिले के अधिकारी द्वारा चर्चा के लिए बुलाया गया, जिसमें अपर कलेक्टर से प्रतिनिधिमण्डल की चर्चा में पदाधिकारियों ने पारदर्शिता के अभाव में काऊंसिलिंग निरस्त करने की मांग की। हालांकि शिक्षक साझा मंच के इस मांग पर कोई सुनवाई होती नहीं दिखी और काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई । कुछ व्याख्याता ने तो अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में संगठन के आह्वान को दरकिनार कर जिला पंचायत के पीछे के रास्ते से 8 बजे से ही पहुंचकर काउंसलिंग में भाग लेने लग गए तो वहीं विरोध प्रदर्शन शांत होने के बाद मिडिल स्कूल के शिक्षक भी काउंसलिंग में हिस्सा लेने पहुंच गए। इस तरह कुल मिलाकर प्रशासन के प्रेशर यानी दबाव में आकर अपनी नौकरी बचाने के लिए बहिष्कार और प्रदर्शन के बावजूद सुबह के समय व्याख्याता और दोपहर बाद मिडिल स्कूल के 66 शिक्षकों ने काउंसलिंग में हिस्सा ले लिया। जिला प्रशासन ने दावा किया कि शांतिपूर्ण तरीके से काउंसलिंग की प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान कलेक्टर दिव्या मिश्रा भी काउंसलिंग का जायजा लेने के लिए पहुंचती रही । हालांकि काउंसलिंग के दौरान भी को शिक्षक इस बात पर विरोध जताते रहे की पारदर्शिता और वरीयता क्रम को ध्यान में नहीं रखा जा रहा है। कुछ शिक्षकों ने बताया कि वरीयता क्रम में जिनका उम्र ज्यादा है उन्हें पहले रखना था लेकिन उनसे कम उम्र के शिक्षक को वरीयता क्रम में पहले स्थान पर रखा गया है। ऐसी छुटपुट और शिकायतें काउंसलिंग के दौरान भी देखने को मिली। लेकिन अंततः नौकरी को बचाए रखने के लिए काउंसलिंग में शिक्षक हिस्सा लेते नजर आए और बहिष्कार मात्र एक विरोध प्रदर्शन बनकर रह गया।
प्रदर्शन में ये शिक्षक रहे शामिल
विरोध प्रदर्शन में शिक्षक साझा मंच के जिला संचालक दिलीप साहू, जितेंद्र शर्मा,देवेंद्र हरमुख, वेदप्रकाश साहू, रामकिशोर खारांशु,शिव शांडिल्य,वीरेन्द्र देवांगन ,नरेंद्र कुमार साहू, पवनकुंभकार, सूरज गोपाल गंगबेर, गजेंद्र रावटे, अविनाश साहू, हरीश साहू,शिवेंद्र बहादुर साहू,शेषलाल साहू, ,संदीप दुबे, खिलानंदसाहू,अमितसिन्हा,रामकृष्ण ,रिखी राम ध्रुव,द्वारिका भारद्वाज,सुरेश सिन्हा, धीरज कस्तूरे,नितिन सोनबरसा,संतोषी शांडिल्य,उमेश साहू,,कृष्णकांत यादव,गुलाब भारद्वाज,महेंद्र तांडिया,लीलाधर ठाकुर,रूपेश गौतम, रविन्द्र नाथ योगी,विजय साहू, कांतू चंदेल, मोहन सिन्हा, उमेश साहू, मनीष मसियारे, नितीन सोनबरसा, जितेंद्र यादव,अमित सिन्हा, महेंद्र टांडिया, रोमन साहू, धनेश सिन्हा, रामदास साहू, सुरेश सिन्हा, बृजमोहन मानिकपुरी,संतोष देवांगन,पुरूषोत्तम साहू,जनक साहू, पूजा गंधर्व,सावित्री निर्मलकर, धीराजी पटेल,लोकेंद्र साहू,मनोज ठाकुर,दुर्गेश यादव,चित्रभान साहू,नोखेलाल साहू,नेतराम पटेल,योगेश ठाकुर,नारायण साहू,मोहन सिन्हा, मुनमुन सिन्हा,
सरिता दिवान, द्रौपदी साहू आदि शामिल थे।
