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सनौद में महिला का हुआ निधन, ग्रामीणों ने लगाया धर्मांतरण का आरोप, मुक्तिधाम में दफनाने के लिए नहीं दी जगह, बनी विवाद की स्थिति

तहसीलदार, पुलिस प्रशासन ने कराई सुलह, भविष्य में दिलाएंगे शासन से जमीन, धमतरी के कब्रिस्तान ले जाकर हुआ अंतिम संस्कार

ग्रामीणों ने कहा: गांव में सात परिवार के करीब सौ सदस्य मानते हैं ईसाई धर्म को, नहीं मानते गांव के रीति रिवाज इसलिए नहीं देंगे गांव के मुक्तिधाम में जगह

गुरुर। गुरुर ब्लॉक के ग्राम सनौद में धर्मांतरण के आरोप के चलते एक महिला को गांव के मुक्तिधाम में ग्रामीणों ने दफनाने के लिए जगह नहीं दी। 56 वर्षीया महिला सुकून बाई साहू पति अशोक साहू का सोमवार को सुबह करीब 4:30 रायपुर एम्स अस्पताल में निधन हो गया। घर वाले उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शव को गांव लेकर आए। ईसाई धर्म के मुताबिक गांव के मुक्तिधाम स्थल पर दफनाना चाह रहे थे। पर ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध कर दिया मामला थाने और तहसीलदार तक पहुंचा। जिसके बाद बढ़ते तनाव की स्थिति को संभालने के लिए तहसीलदार हनुमत श्याम सहित पुलिस प्रशासन एसडीपीओ बोनी फॉसएक्का सहित आसपास थाने की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया कि गांव के मुक्तिधाम स्थल पर ही दफनाने दे। लेकिन ग्रामीणों ने एक जुटता से विरोध किया और कहा कि उक्त परिवार के लोग ईसाई धर्म को अपना चुके हैं और गांव के रीति रिवाज को मानते नहीं हैं इसलिए हम उन्हें गांव के मुक्तिधाम के आसपास दफनाने के लिए जगह नहीं देंगे। वही ग्रामीणों को विरोध के देखते हुए कुछ घंटे के लिए लाश को सड़क पर छोड़कर ही मृतिका के पति अशोक साहू सहित अन्य सदस्य घर चले गए थे। जिसके बाद पुलिस प्रशासन और तहसीलदार के समझाइश के बाद मामले में सुलह का रास्ता अपनाते हुए तय हुआ कि भविष्य में प्रशासन के जरिए ईसाई धर्म मानने वालों के लिए के कब्रिस्तान या चर्च यार्ड हेतु शासन से जगह आवंटित करवाया जाएगा। इसके लिए मृतका के परिवार की ओर से बेटे रितु राम साहू के जरिए शासन प्रशासन के नाम पर आवेदन लिखवाया गया कि उनकी मां शकुन बाई का सुबह 4:30 बजे निधन हुआ। मेरी मां और मेरे विश्वास के अनुसार मसीही विधि के मिट्टी कार्यक्रम हेतु गांव वासियों के विरोध के कारण गांव में दफनाना संभव नहीं होने कारण निकट भविष्य में आने वाले विरोध से बचने हेतु गांव में ही मसीही कब्रस्तान हेतु जमीन आवंटन किया जाए। अभी शांति व्यवस्था के तहत शव को गांव के बाहर धमतरी कब्रिस्तान भेजा गया। मौके पर घटना की जानकारी मिलने पर पास्टर सहित अन्य ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वाले भी पहुंचे हुए थे। ग्रामीणों के बीच सुलह करते हुए महिला की लाश को धमतरी कब्रिस्तान में जाकर दफनाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब सात परिवार के 100 सदस्य हैं । जो ईसाई धर्म अपना चुके हैं। हालांकि मृतका परिवार के सदस्यों का कहना था कि भले ही वह ईसा मसीह को भी मानते हैं लेकिन उन्होंने साहू समाज के रीति रिवाज को भी मानना बंद नहीं किया है। लेकिन ग्रामीणों ने उक्त परिवार पर धर्मांतरण करने का आरोप लगाया और हिंदू रीति रिवाजों को नहीं मानने के चलते नाराजगी के कारण उनके परिवार में किसी के भी निधन होने पर गांव के मुक्ति धाम में जगह नहीं देने की बात पर अड़े रहे। तहसीलदार हनुमत श्याम ने बताया कि तनाव की स्थिति को देखते हुए महिला के शव को धमतरी चर्च के कब्रिस्तान भिजवाया गया और निकट भविष्य में गांव में मसीही समाज को मानने वालों के लिए कब्रिस्तान हेतु जगह आवंटित हो इसके लिए भी प्रयास करेंगे। इस हेतु मृतक परिवार की सदस्यों से आवेदन लिया गया है। तो साथ ही क्षेत्र में ऐसे ईसाई धर्म को मानने वालों की संख्या बढ़ रही है जिसके लिए तहसील स्तर पर भी कब्रिस्तान के लिए जगह आवंटन के लिए प्रक्रिया भी चल रही है। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धमतरी कब्रिस्तान में महिला के शव को भिजवाया गया। जहां मसीह समाज के विधि विधान के अनुसार उनका अंतिम संस्कार हुआ और गांव वाले भी मान गए।

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