जिले में आठवीं आर्थिक गणना के सुचारू संचालन हेतु जिला स्तरीय समन्वय समिति गठित

आर्थिक गणना की रिपोर्ट के आधार पर राज्य और देश की योजनाएं होंगी तय

बालोद। छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन नया रायपुर के निर्देशानुसार जिले में आठवीं आर्थिक गणना के सुचारू संचालन हेतु जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। जिसमें कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा जिला स्तरीय समन्वय समिति की अध्यक्ष होंगी। इसी तरह समिति में सदस्य सचिव जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी होंगे। इसी तरह समिति के सदस्य जिला पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत अधिकारी, महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, सहायक संचालक ग्रामोद्योग विभाग, जिला श्रम पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग, जिला जनसंपर्क अधिकारी एवं जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी होंगे।

क्या है योजना

आठवीं आर्थिक गणना भारत में होने वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सर्वेक्षण है, जो देश भर में सभी प्रतिष्ठानों की संरचना और संचालन से संबंधित विस्तृत डेटा एकत्र करती है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।

कब हुई थी आखिरी गणना?

सातवीं आर्थिक गणना 2019 में शुरू हुई थी और कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में पूरी हुई। आठवीं आर्थिक गणना की तैयारियां भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा शुरू कर दी गई हैं। यह गणना दिसंबर 2025 के बीच पूरे भारत में होने का निर्णय लिया गया है।

ये है गणना का उद्देश्य:

आठवीं आर्थिक गणना का मुख्य उद्देश्य देश के समस्त उद्यमों की स्थिति, कार्य की प्रकृति, स्वामित्व, वित्तीय प्रबंधन और रोजगार आदि से संबंधित आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराना है। इन आंकड़ों का उपयोग देश और राज्यों के सर्वांगीण विकास के लिए संतुलित नीति निर्धारण और नियोजन में किया जाएगा। इसका लक्ष्य अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, खासकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे उद्यमों, स्टार्टअप्स और MSMEs को सशक्त करना है, जिससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिल सके।आर्थिक नीतियों को समावेशी दृष्टिकोण से तैयार करने में मदद करना, ताकि हर नागरिक को लाभ मिल सके।

डिजिटल तरीके से होगी गणना

यह आर्थिक गणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। इसके लिए वेब-आधारित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा, जिससे बेहतर और सटीक जमीनी स्तर से डेटा एकत्र किया जा सके। इस गणना के लिए बड़ी संख्या में गणनाकार और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। आंगनवाड़ी सेविकाओं और आशा कार्यकर्ताओं को भी प्रगणक के रूप में लगाया जा सकता है।

मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम:

डेटा की गुणवत्ता और सत्यता सुनिश्चित करने के लिए मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें जिलाधिकारी, जिला सांख्यिकी अधिकारी और आईटी विशेषज्ञ टीम शामिल होंगे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस गणना के सफल संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समितियों का गठन किया जा रहा है। ये समितियां आर्थिक गणना के संचालन की तैयारियों और इसमें आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी समस्याओं की समीक्षा करेंगी और उनका समाधान करेंगी।

डेटा संग्रहण:

इस गणना में औद्योगिक इकाइयों की गणना और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। उद्यम की स्थिति, प्रकृति, स्वामित्व, वित्तीय प्रबंधन और रोजगार आदि से संबंधित सूचनाएं जुटाई जाएंगी। कुल मिलाकर, आठवीं आर्थिक गणना भारत की आर्थिक स्थिति का एक व्यापक स्नैपशॉट प्रदान करेगी, जो भविष्य की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

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