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राष्ट्रीय पंचायत दिवस विशेष: पहले पति ने संवारा गांव को, अब पत्नी के हाथों में कमान

वर्तमान सरपंच पूनम संजय साहू और पूर्व सरपंच संजय साहू

कुरदी पंचायत डिजिटल के साथ अपराध मुक्त गांव की ओर बढ़ा रहा कदम

नशाबंदी के लिए यहां खुद के ही नियम कायदे लागू, गांव में ही अर्थदंड की व्यवस्था, थाने तक नहीं पहुंचते मामले

बालोद। पंचायत सशक्तिकरण के साथ स्थानीय स्वशासन को मजबूती दिलाने की शुरुआत हुई थी। 24 अप्रैल को पंचायती राज अधिनियम लागू हुआ था। इसके उपलक्ष्य में हर वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायत दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर हम बालोद जिले के एक ऐसे पंचायत से आपको परिचित करवा रहे हैं। जो अपने आप में खुद के कानून व्यवस्था के तहत संचालित होता है। यहां अपराध और नशे को रोकने के लिए गांव और पंचायत स्तर पर ही अर्थ दंड की व्यवस्था है। गांव में आसामाजिक तत्वों को निगरानी के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए गए हैं। जिनकी मॉनिटरिंग पंचायत से ही होती है। बात कर रहे हैं हम गुण्डरदेही ब्लॉक के कुरदी पंचायत की। जो की बालोद से अर्जुंदा मुख्य मार्ग पर स्थित है। इस गांव की वर्तमान सरपंच पूनम संजय साहू है। इसके पूर्व उनके पति संजय साहू पूरे 5 साल तक गांव को संवारते रहे । उनके नवाचारों को अब उनकी पत्नी आगे बढ़ा रही है। यह पंचायत, अन्य पंचायत के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। यहां शराब, सट्टा ,जुए आदि की रोकथाम के लिए गांव स्तर पर ही कड़े नियम कायदे हैं।

इस तरह से वसूले जाते हैं अर्थदंड

शराब बेचने पर 10000, लेने वालों के लिए 15000, सट्टा लिखने वालों के लिए 50000 अर्थ दंड का नियम है। सार्वजनिक जगह पर शराब पीने वालों से भी ₹1000 अर्थदंड वसूला जाता है तो वहीं इसकी सूचना देने वाले को ₹500 का इनाम भी दिया जाता है। पूर्व सरपंच संजय साहू ने बताया कि गांव के कुछ लोग उनके कार्यकाल के दौरान शराब बेचने में संलिप्त थे। तो सट्टा का कारोबार भी शुरू हो गया था। जब एक व्यक्ति शराब बेचते हुए पकड़ाया तो फिर उसे हमने कड़े नियम कायदों को लागू करते हुए दंडित किया। फिर उनके द्वारा अन्य शराब बेचने वालों का खुलासा किया गया। देखते-देखते ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के नाम सामने आते गए। उन्हें ग्राम स्तर पर ही दंडित किया गया ना कि किसी को पुलिस के हवाले किया गया। और धीरे-धीरे यह व्यवस्था काम करने लगी और अब काफी सुधार आ चुका है। गांव की आबादी लगभग 1700 है। जो की 12 वार्डो में निवासरत है। गांव को डिजिटल बनाने के लिए पूर्व सरपंच संजय साहू द्वारा प्रयास शुरू किया गया था। जो आज कामयाब हो चुका है। अब उनकी पत्नी भी इस पहल को आगे बढ़ा रही है और आसामाजिक तत्वों की निगरानी के लिए ही जगह-जगह कैमरे लगाए गए हैं।

ऐसे हुई अपराधों और सामाजिक बुराइयों को रोकने की शुरुआत, थाना तक नहीं जाते मामले, गांव में ही होती है सुलह

एक वक्त होता था जब इस गांव में अवैध शराब बिक्री और सट्टा का कारोबार फल फूलने लगा था। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ रही थी। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पंचायत ने अपने स्तर पर अर्थदंड व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया। अब यह स्थिति है कि यहां अगर कोई शराब बेचने, खरीदने, सार्वजनिक जगह पर शराब पीते, सट्टा लिखते पकड़े जाते हैं तो मामला थाना तक नहीं जाता। बल्कि गांव स्तर पर ही ऐसे लोगों को दंडित कर उन्हें सुधार दिया जाता है। अब तक कुल 14 लोगों को इस तरह से दंडित कर विभिन्न अपराधों के लिए जुर्माना रूपी अर्थ दंड राशि वसूली की गई है। उन अर्थदंड राशि से प्राप्त आय को 75% ग्रामीण फंड और 25% पंचायत फंड में जमा कर गांव के विकास के लिए खर्च किया जाता है। सरपंच पूनम संजय साहू ने बताया कि वर्तमान में पंचायत में कुल 9 महिला पंच है और स्वयं एक महिला सरपंच के साथ नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए भी गांव को एक नई पहचान दिला रहे हैं।

इन मामलों में दूसरों से अलग है ग्राम पंचायत कुरदी

गांव को सुधारने के लिए अर्थ दंड की कड़ाई के साथ पालन के अलावा कुछ और भी खासियत इस गांव की है। जो इस पंचायत को दूसरों से अलग करती है। गांव में ग्राम पंचायत स्तर पर 111 फीट ऊंचा तिरंगा लहराता है। जिसका उद्घाटन विगत माह विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने किया था। यहां वीर सपूत उद्यान भी बनाया गया है। जहां पर देश के सभी महापुरुषों की आकर्षक प्रतिमाएं, छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा सहित अन्य आजादी के दीवानों की तस्वीर पत्थरों पर अंकित की गई है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो चुका है। आसपास के गांव के लिए यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। गांव को डिजिटल और अपराध मुक्त बनाने के प्रयास पहले से ही जारी है।

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