दूध गंगा सहकारी समिति बालोद के अध्यक्ष द्वारा की गई है बड़ी अनियमितता, जांच के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई, कलेक्टर से हुई शिकायत



बालोद। दूध गंगा सहकारी समिति मर्यादित बालोद में दूध गंगा में ही हो रही अनियमिता के लिए उप पंजीयन सहकारी संस्था में आवेदन दिया गया था। जिस पर जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच में यह पाया गया था कि अध्यक्ष कमलेश गौतम ने दूध गंगा के नियमों के विरुद्ध कार्य किया गया है। 2 अप्रैल 2025 को जांच की रिपोर्ट शिकायतकर्ताओं को प्राप्त भी हो चुकी है। जिसमें स्पष्ट रूप से अध्यक्ष दोषी पाया गया है। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदकों में किसान नारद साहू , दिग्विजय सिन्हा,नितिन कुमार, सुधाकर यादव सहित अन्य किसानों ने कहा कि मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। इस संबंध में कलेक्टर को दोबारा शिकायत करते हुए जांच प्रतिवेदन और देवभोग द्वारा बोनस प्राप्त करने वालों की सूची, किसानों का दूध खरीदी बंद करने का आदेश प्रतिलिपि आदि संलग्न करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। जांच प्रतिवेदन में लिखा है कि अध्यक्ष द्वारा संस्था की संपत्ति की बिना प्रस्ताव/ निर्णय की अपनी मनमानी का परिचय देते हुए बिक्री किया गया है। खोवा मशीन के बिक्री का मुद्दा एजेंडा में नहीं लाया गया है ना ही चर्चा हुआ है। जिसकी शिकायत किसानों द्वारा किया गया है। इसमें वह स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बिना जानकारी के बिक्री किया गया है। जिसका बिक्री रसीद नहीं काटा गया है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट है की शिकायत के बाद राशि जमा किया गया है। जो अध्यक्ष पद का दुरुपयोग किया गया है। ऐसे संचालक सदस्यों को पद एवं संस्था के प्राथमिक सदस्यता से बाहर किया जाना चाहिए। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया की पूर्णिमा गौतम प्रथम बैठक में उपस्थित हुए हैं और आज तक बैठक में सम्मिलित नहीं हुए हैं। 20 मीटिंग में 6 मीटिंग में फर्जी हस्ताक्षर किया गया है। लगातार तीन मीटिंग में उपस्थित नहीं होने पर बिंदु क्रमांक 7.3.4 के उल्लेख की प्रबंध कमेटी की बैठक में सतत तीन बार अनुपस्थित रहने , पर सदस्यता समाप्त हो जाएगी। जबकि निर्वाचन के समय फर्जी हस्ताक्षर कर फॉर्म जमा किया गया है। यह प्रतीत हो रहा है की पूर्णिमा गुप्ता को दोषी करार देते हुए सदस्यता समाप्त किया जाए। जांच रिपोर्ट के अनुसार शिकायत करने के बाद देवभोग का बोनस राशि जमा किया गया जबकि राशि उनके खाते में आ गया था। शिकायत नहीं किया जाता तो राशि को स्वयं लाभ लेने का मंशा जाहिर होता है। जो भी नाम भेजा गया है जिसकी जानकारी प्रस्ताव निर्णय में नहीं लिया गया है। जिसके आधार पर कड़ी से कड़ी इन पर कार्रवाई करने की मांग किसान करते हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि अध्यक्ष अपने निजी स्वार्थ एवं स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपने दो पुत्र को सम्मिलित कर वेंडर बनाया गया है एवं वेंडर नियुक्त किया गया। जिसकी जानकारी प्रस्ताव निर्णय एजेंडा में नहीं आया एवं वेंडर का राशि निर्धारण भी नहीं कर राशि संस्था से भुगतान किया जा रहा है। जो नियम विरुद्ध है । जबकि किसी भी संचालक सदस्य अपने परिवार एवं नजदीकियों के रिश्तेदार को संस्था के समान व्यवसाय नहीं कर सकता ना ही ठेके (वेंडर) में भी सम्मिलित नहीं हो सकता यह स्पष्ट बिंदु क्रमांक 7.2.6 में उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद स्वयंप्रभुता का परिचय दिया जा रहा है। इस विषय में दोनों संचालक सदस्य के दो पुत्र होने के कारण अध्यक्ष एवं उनके धर्म पत्नी पूर्णिमा का प्राथमिक सदस्य समाप्त किया जा सकता है। वेंडर द्वारा पूर्व में कार्यरत कर्मचारियों का हनन किया गया है एवं अपने चहेते कर्मचारियों का स्वयं वेतन बढ़ा कर दिया जा रहा है। जिसका प्रस्ताव निर्णय एजेंडा में नहीं लिया गया है, ना ही चार्ज किया गया है।

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