DAILY BALOD NEWS

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पर्यटक सावधान: भोला पठार के आसपास पहाड़ियों में मिले तेंदुए के दो शावक, लगातार बदल रही अपना ठिकाना, वन विभाग ने लगाया जंगल में आवाजाही पर रोक

बालोद । बालोद जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भोला पठार की पहाड़ियों में तेंदुए की दो महीने के दो शावक मिलने की पुष्टि हुई है। लगातार उक्त शावक अपनी जगह बदल रहे हैं । जिससे वन विभाग उन्हें ट्रैक नहीं कर पा रहा है। वन विभाग द्वारा एक फोटो और वीडियो जारी किया गया है। जिसमें एक शावक चट्टानों के नीचे नजर आ रहा है। कुछ देर बाद जब दोबारा उस जगह पर जाकर देखा गया तो वह वहां पर नहीं था । जानकारी के अनुसार दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी आंखें खुल चुकी है। मादा तेंदुआ अपने बच्चों को लेकर लगातार अपना ठिकाना बदल रही है। वन विभाग की एसडीओ डिंपी बैस ने बताया कि तेंदुए का स्वभाव बिल्ली जैसा होता है। जो अपने बच्चों को लेकर बार-बार स्थान बदलता है। यदि वह खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं तो आक्रामक हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को जंगल में न जाने की सलाह दी गई है। सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तेंदुओं को चट्टान वाले इलाके पसंद होते हैं। बालोद के जंगलों में ऐसी भौगोलिक संरचना है जो उनके लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। अक्सर गर्मी के दिनों में नारागांव सियादेही, रानीमाई, मर्रामखेड़ा मड़वापथरा, डौंडी सहित अन्य पथरीले इलाकों में तेंदुए देखे जाते हैं। भोला पठार चूंकि क्षेत्र का धार्मिक स्थल है। जिसे छत्तीसगढ़ का कैलाश भी कहा जाता है। गर्मी की छुट्टियों में भी लोग यहां घूमने के लिए आते रहते हैं। ऐसे में विभाग ने खास तौर से पर्यटकों से अपील की है कि वह सतर्क रहे और जंगल की ओर जाने से बचे। तो वन विभाग की टीम लगातार शावकों के नए ठिकाने की तलाश में लगी हुई है। ताकि लोगों को बताया जा सके कि तेंदुए और उनके बच्चे किस ओर हैं। और ग्रामीण और पर्यटकों को उन लोगों में जाने से रोका जा सके।

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