बालोद। गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने विधानसभा सत्र के दौरान मछुआ समुदाय के आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अनुसूचित जनजाति के संबंध में केवल महारा सहित कुछ समुदाय को शामिल करने की बातों की चर्चा होती है लेकिन 1950 के पूर्व के मेरे पास रिकॉर्ड है जिसमें 1950 में मछुआ समुदाय अनुसूचित जाति में था। उसके बाद हमें बाहर कर दिया गया। यह प्रश्न चिन्ह है? इसके लिए हम लगातार संघर्ष कर रहें। सभापति से आग्रह करूंगा कि इस संबंध में शासन से रिपोर्ट मंगवाई जाए और हम भी डाटा उपलब्ध करा देंगे कि कब हम अनुसूचित जाति में थे और कैसे बाहर हो गए हैं। इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। असम में हम एससी में है, महाराष्ट्र में हम एसटी में आते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में हमें अलग वर्ग में रखकर अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए का ओर ध्यान देने की मांग की है। ताकि आरक्षण के मुद्दे पर मछुआ समुदाय के हितों की सुरक्षा हो और उन्हें उनका अधिकार मिले। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि मछुआरा मांझी समुदाय के तहत आने वाले धीवर, निषाद, केवट, कहार, मल्लाह, भोई एवं अन्य समानार्थी जनजातियों को वर्ष 1950 तक अनुसूचित जनजाति वर्ग में रखा गया था, जिसका प्रमाण शासन के राजपत्रों में अब भी मौजूद है। लेकिन 1950 के बाद मछुआरा समुदाय के समस्त जनजातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में डालकर उन्हें आरक्षण से वंचित कर दिया गया है। इसके बाद से ही इस आरक्षण को फिर से बहाली की मांग को लेकर बीते 75 सालों से मछुआरा सामुदायिक संघर्षरत है।
विधायक कुंवर सिंह निषाद ने मछुआ समुदाय के आरक्षण का उठाया विधानसभा में मुद्दा, कहा : दूसरे राज्य में मछुआ समुदाय एसटी और एससी में शामिल है पर छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं?
