बालोद/ गुरुर। विगत दिनों नगर पंचायत गुरुर के शपथ ग्रहण समारोह में विधायक संगीता सिन्हा को अतिथि नहीं बनाए जाने पर कांग्रेसी नाराज नजर आए थे। तो वही बालोद नगर पालिका में भी प्रशासन द्वारा कार्ड में उनका नाम अतिथि के रूप में नहीं डाले जाने पर वहां के पार्षदों ने भी नाराजगी जताई तो सोमवार को नगर पालिका बालोद के कांग्रेसी पार्षदों को लेकर विधायक संगीता सिन्हा एसडीएम कार्यालय में उन्हें अलग से शपथ दिलवाने के लिए चली गई। जिसका वीडियो, फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। इस पूरे मामले पर गुरुर क्षेत्र की जनपद सदस्य संध्या अजेंद्र साहू ने विधायक संगीता सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा है कि लगातार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेसियों की हार से कांग्रेस सहित विधायक और उनके समर्थक बौखला गए हैं और यही वजह है कि भाजपा सरकार में उनकी पूछ परख नहीं हो रही तो अपना अस्तित्व बचाने के लिए विधायक संघर्ष कर रही है और अपने समर्थित पार्षदों और सदस्यों को अपने इशारे पर नचाने की कोशिश कर रही है। इस बात की पुष्टि इसी तस्वीर से होती है कि जब नगर पालिका प्रशासन बालोद ने उन्हें अतिथि नहीं बनाया तो अपने मन मुताबिक कांग्रेसी पार्षदों की अगुवाई करते हुए अतिथि स्वरूप एसडीएम कार्यालय में बाकायदा बैठकर उनको शपथ करवाने लग गई। जनपद सदस्य संध्या साहू ने कहा कि पार्षद भले कांग्रेस , भाजपा के समर्थित होकर चुनाव लड़ते हैं या कोई निर्दलीय भी भाग्य आजमाते हैं जो जीत कर आते हैं, उनसे जनता की कई अपेक्षाएं होती है। राजनीति से परे हट कर उन्हें अपने वार्डों के विकास को लेकर ध्यान देने की जरूरत होती है। जीत के बाद उन्हें किसी के इशारे पर चलने की जरूरत पड़ रही है तो यह उनकी वास्तविक जीत नहीं है। मानो जीत के बाद भी ऐसे जनप्रतिनिधि कठपुतली बनकर रह जाते हैं। विधायक संगीता सिन्हा जिस तरह से नगर पालिका बालोद के कांग्रेसी पार्षदों का नेतृत्व कर पृथक शपथ ग्रहण करवाने में सफल रही यह बताता है कि अब उसकी जनता जनार्दन सहित प्रशासन में भी पूछ परख कम हो गई है और आने वाले समय में वह दिन दूर नहीं जब विधानसभा चुनाव में जनता जनार्दन उन्हें करारा जवाब देगी। जो जवाब नगर पंचायत चुनाव में विधायक के गृह नगर गुरुर में उन्हें मिल चुका है। जहां अधिकतर वार्ड में कांग्रेस समर्थित पार्षद प्रत्याशी हारे हैं। विधायक चाहे कितना भी ड्रामा कर ले, बालोद हो चाहे गुरुर नगर की जनता सब समझदार है।
मीडिया में क्या कहा विधायक ने
तो वही शपथ ग्रहण करवाने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विधायक संगीता सिन्हा कहने लगी कि भाजपा सरकार में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। प्रोटोकॉल के तहत उन्हें (प्रशासन को) विधायक को अतिथि के रूप में आमंत्रित करना था। जो कि नहीं किया गया था। इसलिए कांग्रेस के लोगों ने शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया था। सभी पार्षद जनता की ओर से चुनकर आते हैं और बालोद में ऐसी स्थिति देखने को मिली कि हमारे कांग्रेसी पार्षदों को अलग से शपथ ग्रहण करवाना पड़ा। यह भाजपा सरकार की दादागिरी है। उन्होंने पृथक शपथ ग्रहण क्या उचित है के मीडिया के सवालों पर कहा कि यह सब चलते रहता है। पहले हमारी सत्ता थी, अब उनकी सत्ता है। यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। मैं तो कहती हूं कि शासन को प्रोटोकॉल का सिस्टम बंद ही कर देना चाहिए, जब उसका पालन नहीं कर सकते हैं तो?
कांग्रेस की सत्ता में सांसद को किया जाता दरकिनार तब क्या नहीं होता था प्रोटोकॉल का उल्लंघन?
वही प्रोटोकॉल के सवाल पर जनपद सदस्य संध्या अजेंद्र साहू ने कहा कि इसके पहले छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सत्ता थी तो भाजपा समर्थित तत्कालीन सांसद मोहन मंडावी को दरकिनार कर दिया जाता था। कई आयोजन में उन्हें पूछा नहीं जाता था। तब क्या प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं होता था। तब भाजपा जन प्रतिनिधियों के साथ जो भेदभाव होता था क्या वह सही था। आज जब खुद के साथ ऐसा हो रहा है तो विधायक प्रोटोकॉल की दुहाई दे रही है । और दूसरी ओर मीडिया के सामने खुद कह भी रही है कि यह सब चलता रहता है। पहले हमारी सत्ता थी अब उनकी सत्ता है…..! इसे साबित होता है कि वह द्वेष की राजनीति खुद जानबूझकर कर रही है और अलग से शपथ ग्रहण करवाना मात्र एक राजनीतिक स्टंट और जनता की सहानुभूति बटोरने का ढोंग मात्र है। लेकिन बालोद के नगर वासी कितने बेवकूफ नहीं है । कौन कहां किस तरह के राजनीति कर रहे हैं सब समझते हैं।
