बालोद । गुरुर ब्लॉक में हुए जिला पंचायत सदस्यों के निर्वाचन में परिणाम जारी करते हुए संबंधित प्रत्याशियों को जो प्रमाण पत्र दिए गए हैं उसमें आधी अधूरी जानकारी दर्ज की गई है। किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले इसकी पूरी जानकारी दर्ज नहीं है। जो भी प्रत्याशी रहे उन्हें सिर्फ उनका ही वोट कितना प्राप्त हुआ, कुल वोट कितने पड़े थे। खारिज वोट कितने पड़े। विधि मान्य वोट कितने हैं, बस इतनी ही जानकारी लिखकर दे दी गई है। चुनाव मैदान में कुल कितने प्रत्याशी थे। सभी प्रत्याशियों को कितने मत मिले यह सब इसमें उल्लेख ही नहीं। जिला पंचायत सदस्य की चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस समर्थित अरकार की बबीता संजय प्रकाश चौधरी ने कहा यह गंभीर मामला है। आधी अधूरी जानकारी दिया गया है। तो इस मुद्दे को लेकर जल्द ही हाईकोर्ट की शरण लेंगे। जितने भी प्रत्याशी मैदान में थे, सभी के मत को एक फॉर्मेट में ना बताकर कर सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशी को और हारने वाले प्रत्याशी को अलग-अलग प्रमाण पत्र में जानकारी दिए गए हैं। जिससे हारे हुए प्रत्याशियों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। अधूरी जानकारी में दिए गए प्रपत्र से प्रत्याशी यह आकलन नहीं कर पा रहे हैं कि किस क्षेत्र में उन्हें कितनी वोटों की हार मिली है या फिर कहां कितने वोटों की बढ़त मिली। ऐसे में प्रत्याशियों में घोर आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसे कई प्रमाण पत्र सामने आए हैं जिन पर पीठासीन अधिकारियों द्वारा संबंधित प्रत्याशी को ही सिर्फ उनकी जानकारी लिखकर दे दी गई है। और उसे क्षेत्र में जितने प्रत्याशी थे वह कितने वोट पाए हैं विजेता कौन रहा इस बात की पुष्टि करते हुए कोई प्रपत्र जारी नहीं किया गया। सरपंच का चुनाव ही क्यों ना हो जो भी प्रत्याशी होते हैं एक प्रपत्र में सभी प्रत्याशियों को इस कितना मत मिला इस बात की पूरी जानकारी के साथ ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है लेकिन गुरूर ब्लॉक के जिला पंचायत चुनाव में इस तरह की लापरवाही देखने को मिली है। जिससे प्रत्याशियों में आक्रोश बना हुआ है ।
चुनाव की पारदर्शिता पर उठे सवाल , जाएंगे हाई कोर्ट
अरकार निवासी वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय प्रकाश चौधरी की पत्नी बबीता चौधरी इस मसले को लेकर अब हाई कोर्ट में जाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रपत्र में आधी अधूरी जानकारी दी है वह भी भ्रामक प्रतीत हो रही है। ऐसे में जो चुनाव जीते हैं उन्हें कितना मत मिला, क्या वह जो मत उनके प्रमाण पत्र में लिखे गए हैं वास्तव में उतने ही है यह बड़ा-चढ़ाकर लिख दिए गए हैं। यह भी संदेह है। ऐसे में निर्वाचन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहा है। ऐसे प्रमाण पत्र जारी करना अफसरों की गैर जिम्मेदाराना हरकत को भी दर्शाता है।
