पढ़ाई को नहीं समझा इसने कभी बोझ, बिना कोचिंग के बनाई मेरिट में जगह: वनांचल ग्राम अरजपुरी के युवक ने किया कमाल



गरुड़ साय ने यूनिवर्सिटी के टॉप 10 में बनाई जगह , ग्रामीणों में छलका खुशियों का उत्साह, शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीणों को मिली नई ऊर्जा

मेरिट सूची में आकर ग्राम सहित बालोद जिले का नाम किया गरुड़ ने गौरवान्वित

बालोद। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग छत्तीसगढ़ द्वारा विश्व विद्यालय मेरिट लिस्ट जारी किया है। जिसमें बालोद जिले के वनांचल ग्राम अरजपुरी के गरुड़ साय मंडावी ने यूनिवर्सिटी के टॉप 10 लिस्ट में स्थान बनाया है। साथ ही अपने गांव सहित पूरे जिले का नाम गौरवान्वित किया है।गरुड़ साय मंडावी पिता स्वर्गीय दूरपत साय मंडावी जिन्होंने अपनी पढ़ाई डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पीजी कॉलेज डोंगरगांव में एमएससी बॉटनी की पढ़ाई की। उन्होंने एमएससी बॉटनी चौथे सेमेस्टर में टॉप कर टॉप टेन की सूची में स्थान प्राप्त किया है। गरुड़ साय मंडावी ने इस सफलता का राज बताते हुए कहा है कि बगैर टेंशन के और एंज्वॉय के साथ स्टडी करने से सफलता मिली है। गरुड़ का कहना है”उसने कभी पढ़ाई का टेंशन नहीं लिया. दोस्तों के साथ खेल कूद साथ ही ट्रैवलिंग करना और दोस्तो के साथ एंजॉय करते अपनी पढ़ाई भी नियमित रूप से करता रहा.”। गरुड़ ने बताया मैने कभी पढ़ाई का टेंशन नहीं लिया और न ही मैने ज्यादा थ्योरीकल नोबेल्ज पर निर्भर रहा। हर एक चीज को सीखने और जानने की ललक रखता रहा,जिसका परिणाम है कि मुझे अच्छे अंक मिले।

कोचिंग और ट्यूशन के पाई सफलता

गरुड़ साय ने साबित किया है ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से ही उड़ान होती है.’ गरुड़ साय मंडावी ने बिना किसी कोचिंग और ट्यूशन के ये मुकाम हासिल किया है। गरुड़ साय का जुड़ाव आदिवासी समाज की प्रगति में अपना योगदान देना है। वह पढ़ाई के साथ साथ समाज एवं राजनीति में भी अपनी इच्छा जाहिर की है। गरुड़ साय के टीचर्स का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि प्रदेश में वह टॉप लिस्ट में आएगा।

गांव में खुशी का माहौल, बधाई देने वालों का लगा तांता

गांव का नाम रोशन करने वाले गरुड़ साय मंडावी को उनके शिक्षकों एवं साथी पढ़ने वाले इष्ट मित्रो ने बधाई प्रेषित की। साथ ही क्षेत्र के युवा नेता पंकज जैन ने उनको शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। साय के परिवार में भी सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे है। गांव के अन्य युवाओं को गरुड़ की इस सफलता से प्रेरणा मिली है ।

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