भाजपा, कांग्रेस से संभावित चेहरों में बड़े नाम भी आ रहे सामने, बनने लगी वार्डो में रणनीति
सुप्रीत शर्मा, बालोद । बालोद जिला मुख्यालय के नगर पालिका हेतु सामान्य महिला वर्ग हेतु आरक्षण होने के बाद दोनों प्रमुख दलों से कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। वहीं कुछ सुगबुगाहट निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। बालोद नगर पालिका में पिछले दो कार्यकाल की बात करें तो कांग्रेस का कब्जा रहा है । विकास चोपड़ा युवा तुर्क के रूप में बालोद के दो बार अध्यक्ष बने। वहीं लगातार 3 बार विधानसभा में भी कांग्रेस का कब्जा बरकरार है। जातीय समीकरण किसी भी चुनाव में काम नही कर रहा है। ऐसा लोगो का मानना है। बालोद नगर पालिका की बात की जाए तो 2014 से पहले लगातार 3 बार भाजपा समर्थित अध्यक्ष रहे हैं। इस बार भाजपा अपनी खोई हुई सीट को वापस पाने काफी मेहनत कर रही है। चुनाव के तारीख की घोषणा भी जल्द होने वाली है। इसके बाद राजनीतिक पारा भी चढ़ने वाला है । दोनो दलों में दावेदारों की कतार लंबी है। दोनों ही प्रमुख पार्टियों अपने-अपने प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। दावेदार सामने आ रहे हैं। लोग आवेदन दे रहे हैं और पार्टी के पदाधिकारी उनके बायोडाटा सहित उनके वर्चस्व का आकलन भी कर रहे हैं। चूंकि अब आचार संहिता लग गई है तो दोनों ही पार्टी अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम के पत्ते जल्द खोल सकती है। ताकि जल्द से जल्द चुनाव प्रचार शुरू किया जा सके । नामांकन फॉर्म भरने की औपचारिकता होती रहेगी। अभी पार्टी का प्रयास है कि जितनी जल्दी हो सके प्रत्याशी तय करके मैदान में उतरे और प्रचार में तेजी लाए। कहीं ऐसा ना हो कि प्रत्याशी तय करने में ही वक्त जाया हो जाए। इसलिए वक्त न गंवाते हुए दोनों पार्टियां अब जल्द अंतिम निर्णय की ओर अग्रसर हो रही है। तो वहीं दावेदारों की धड़कनें भी बढ़ी हुई है। इस बार महिलाएं मैदान में उतरने वाली हैं। जो स्वयं वर्षों से अपने अपने दल में नेत्री हैं, वह तो मौका तलाश ही रही है कि उन्हें टिकट मिल जाए। तो वहीं कुछ वरिष्ठ नेता भी है जो अध्यक्ष बनने की चाह में थे पर उनके हिसाब से आरक्षण न आ पाने के बाद अब अपनी पत्नियों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहें हैं । दोनों ही पार्टियों में दावेदारों के आवेदनों पर विचार चल रहा है। चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। जल्द ही फाइनल लिस्ट जारी हो जाएगी।
इन महिलाओं के दावेदारी की चर्चा ज्यादा
सूत्रों की माने तो कांग्रेस से पूर्व पालिका उपाध्यक्ष एवं पार्षद पद्मिनी साहू, वर्तमान पार्षद दीप्ति शर्मा, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामजी भाई पटेल की पुत्र वधु तृप्ति पटेल, रश्मि दुबे सहित अन्य नामो की दावेदारी सामने आई है तो एक तरफ निर्वत्तमान पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा की पत्नी प्रियंका चोपड़ा का नाम भी संभावित दावेदारों में था। पर उन्होंने चुनाव नही लड़ने की मंशा जाहिर करके सभी प्रश्नों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। पर राजनीति से जुड़े सूत्रों की माने तो वह भी एक मजबूत प्रत्याशी हो सकती है। वहीं राज्य और केंद्र की सत्ता में काबिज भाजपा नगर में काबिज होने प्रत्याशी चयन हेतु काफी संवेदनशील नजर आ रही है। भाजपा में प्रमुख दावेदारों में पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिभा चौधरी, पूर्व पालिका अध्यक्ष लीला शर्मा, डॉ मोना टुवानी, हितेश्वरी कौशिक, प्रीति देशमुख का नाम सूची में है। वहीं भाजपा के कार्यकर्ताओं के अलावा अनेक समाज संगठन प्रमुखों की मांग पर भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष यशवंत जैन की पत्नी ललिता जैन का नाम भी शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी छात्र राजनीति की शुरुवात करने वाले यशवंत जैन आज भाजपा की दृष्टि से प्रदेश के नेताओ में एक चर्चित और कुशल संगठक के रूप में पहचाने जाते हैं। वहीं बालोद नगर में उनकी सभी वर्गों में एक अच्छी खासी पकड़ भी मानी जाती है। इन्ही सब के चलते उनकी पत्नी ललिता जैन को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वैसे अभी तक किसी भी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नही किया है। दोनो दल की नजर एक दूसरे के प्रत्याशी पर टिकी हुई है।
पार्षद बनने भी टिकट पाने होड़ मची
वहीं पार्षद पद हेतु भी दोनो दलों में कार्यकर्ताओं में टिकिट पाने की होड़ मची हुई है। सभी अपने नेताओं के आसपास दिखाई दे रहे हैं। खैर दोनो प्रमुख दलों में प्रत्याशी कौन होगा यह अभी भविष्य के गर्त में हैं और पालिका अध्यक्ष का ताज किसके सर पर सजेगा यह जनता की अदालत में तय होना है। क्योंकि इस बार अध्यक्ष का चुनाव जनता के द्वारा होना है। पिछले पंचवर्षीय में पार्षदों के जरिए अध्यक्ष चुने गए थे। इस बार अध्यक्ष प्रत्याशी को चुनाव जीतना भी चुनौती पूर्ण रहेगा।
पिछले अध्यक्षों के विकास कार्यों का भी हो रहा आकलन
वहीं पिछले पांच वर्षों में बालोद नगर में विकास के कितने काम हुए, कितने नही। इस बात की चर्चा भी शहर के हर गली मोहल्ले चौक चौराहे में हो रही है। इसका फायदा किस पार्टी के पक्ष में जायेगा यह समय बताएगा। पालिका में भाजपा की जब सत्ता रही और जब कांग्रेस की रही तो विकास की गति क्या रही। इस पर भी आकलन हो रहा है। अभी सरकार छत्तीसगढ़ में भाजपा की है तो उस लिहाज से भी मतदाता विचार कर रहे हैं कि क्यों न इस बार भाजपा समर्थित प्रत्याशी को जिताए। तो वही मतदाता भी पशोपेश में भी है कि आखिर प्रत्याशी कौन है उस हिसाब से भी मतदाता अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं। आमतौर पर यह देखने को भी मिला है कि प्रदेश में जिसकी सरकार रही है उसके समर्थित प्रत्याशी की जीत की संभावना, अन्य पार्टी के प्रत्याशी की अपेक्षा ज्यादा रही है। बशर्ते किसी तरह की गुटबाजी ना हो पाए।
आचार संहिता भी हुई प्रभावशील
इधर 20 जनवरी की शाम को नगरीय निकाय क्षेत्रों में आचार संहिता भी प्रभावशील हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेस कांफ्रेंस के साथ इसकी सूचना जारी कर दी गई है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में एक चरण में ही चुनाव होना है। 11 फरवरी को नगरीय निकाय क्षेत्र में चुनाव होना है। आचार संहिता प्रभावशील होने के बाद अब पार्टियां जल्द ही अपने प्रत्याशियों के नाम सामने ला सकती है । वहीं पंचायत चुनाव भी 17, 20 और 23 फरवरी को होने हैं।
