बालोद/गुरुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी अभियान ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ की शुरुआत गत नौंवे आयुर्वेद दिवस पर की गई। जिसके तहत आयुर्वेद को घर-घर पहुँचाने और भारत में स्वास्थ्य सेवा को समग्र और सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम की पहल की गई। इसी तारतम्य में प्रतापराव जाधव, केन्द्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) भारत सरकार ने कहा है कि आयुर्वेद ही नहीं आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि हर व्यक्ति की एक प्रकृति होती है। अगर उस प्रकृति के अनुसार खानपान और दिनचर्या नहीं होती है तो हम बार-बार या अधिक बीमार होते हैं । गंभीर बीमारियों की भी आशंका होती है । आयुष मंत्रालय के नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के बालोद जिला के विकासखंड गुरूर स्थित ग्राम ठेकवाडीह में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी एवं औषधियों के पहचान एवं निर्माण हेतु 5 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रशिक्षित वैद्यराज महेंद्र के मार्गदर्शन में चिकित्सकों ने वनौषधियों एवं जड़ी-बूटियों की बारीकियों को जाना
प्राचीन वैदिक काल में ऋषि परंपरा के तहत गुरुओं ने अपने शिष्यों के अन्तर्निहित प्रतिभाओं की पहचान करते हुए उन्हें किसी एक विधा में सिद्धहस्त कर हमारे लिए एक आदर्श के रूप में प्रतिष्ठापित कर दिया है। बदलते आधुनिक समय के बावजूद लोगों ने अपने जीवन शैली में आयुर्वेद की उपयोगिता बनाए रखी है। अनेकों लोगों को अपने नाड़ी ज्ञान से दु:साध्य रोगों से आराम दिलाते वैद्यराज महेंद्र कुमार साहू के जन्मदिन पर उनके मार्गदर्शन एवं प्रबंधन में बालोद, दुर्ग, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद से पहुंचे चिकित्सकों, शिक्षाविदों व स्थानीय लोगों ने वनौषधियों एवं जड़ी-बूटियों का प्रत्यक्ष परिचय हासिल किया। इनमें डॉ.गुलाबचंद निषाद सोरम, नरेन्द्र निषाद मोहलई, रामचंद्र जांगड़े नंदिनी सुंदरी, डॉ. वाई.के. सर्वानी करहीभदर, युवराज सिंह लिमऊडीह, डॉ.नरेन्द्र कुमार साहू टेकापार, निहाल कुमार रावटे झलमला, डॉ. उमेश हिरवानी भोथली, दिनेश कुमार साहू ठेकवाडीह, बिसेलाल साहू चूल्हापथरा, डॉ. सावित्री साहू गोकुलपुर, खिलेश्वरी साहू चिटौद, जागेश्वा साहू मारवाड़ी, तुलेश्वर प्रसाद साहू कातरो, बलदेव मरकाम आमापानी, छबेश्वर लाल साहू मालीघोरी, डॉ. बीरबल साहू मोंगरी, ईश्वरी कुमार सिन्हा धुरसा, संजय वस्त्रकार दुर्गुकोंदल, गंगाधर साहू खोरदो आदि सम्मिलित हुए। इस अवसर पर रक्तदान शिविर भी आयोजित की गई।

औषधियों से च्यवनप्राश, अमृतधारा आदि निर्माण में हुए पारंगत ; किया वन भ्रमण
आयुर्वेदिक औषधियों के अधिकांश घटक पञ्चांग अर्थात जड़ी-बूटियों के फूलों, पत्तों, फलों, जड़ों व तनों से प्राप्त की जातीं हैं । ये सभी प्रकृति अर्थात हमारे आसपास ही मौजूद हैं । इस कार्यशाला में 250 प्रकार की जड़ी बूटियों आँवला, तुलसी, भूईं आँवला, मीठा लीम, गिलोय, शंखपुष्पी, अडूसा, विदारी कन्द, सफ़ेद चन्दन, वासाका,अकरकरा, मुनक्का, शतावरी, छोटे हर्रा, ब्राह्मी, बेल, कमल केशर, गोखरू, कचुर, जटामांसी, नागरमोथा, लौंग, पुष्करमूल, काकड़ा सिंघी, पुनर्नवा, जीवन्ति, दसमूल, अश्वगंधा, सोंठ, मुलेठी, कंटकारी, वंशलोचन, पिपली, दालचीनी, तेजपत्ती, नागकेशर, इलायची, शहद, घी इत्यादि से युक्त च्यवनप्राश केश तेल, अमृतधारा, बाम, दन्तमंजन, पथरी व शुगर की दवा साबुन आदि बनाने की प्रत्यक्ष विधा सिखाई गई। अध्ययनरत प्रशिक्षुओं, पूर्व आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, तकनीकी वि.वि. के निदेशक, सीईओ, वरिष्ठ वैद्यराज, शिक्षाविद, योगासान प्रमुख आदि ने वनौषधियों तथा जड़ी-बूटियों को प्रत्यक्ष रूप से ठेकवाडीह ग्राम के आसपास व मंगलतराई, बरबाँधा-हरफर तथा आमापानी के जंगलों में देखा। जंगल भ्रमण में 82 वर्षीय वैद्यराज पतिराम नायक ने औषधियों की पहचान व उपयोगिता पर बेहतर जानकारी दी। गंगरेल बाँध और मुरुमसिली बाँध के संगम पर डॉ.लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने स्वरचित आयुर्वेदिक गीत ‘सभी सुखी हों सभी निरामय, हम सेवा संकल्प न भूलें’ गवाकर सभी को राष्ट्र निर्माण में एकजुट रहने का सन्देश दिया।
आयुर्वेदयति बोधयति इति आयुर्वेदः- डॉ.लक्ष्मीकांत द्विवेदी
सहकार भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने कहा कि आयुर्वेद अर्थात आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका सम्बन्ध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है ।
देश के आर्थिक विकास एवं बड़े पैमाने पर स्वरोजगार में आयुर्वेद बड़ा विकल्प – डॉ.पटेल एवं डॉ.अग्रहांशु
छ.ग. विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ.आर एन पटेल तथा डॉ.अग्रहान्शु द्विवेदी ने जानकारी दी कि स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार का उद्देश्य देश में स्टार्टअप्स और नये विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जिससे देश का आर्थिक विकास हो एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हों । आयुर्वेद को लेकर उन्होंने हर संभव मदद करने की बात कही | बस्तर से बाजार तक के संयोजक सत्येन्द्र सिंह ने हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में कदम रखने के लिए प्रोत्साहित किया | दिव्यांग नोडल अधिकारी श्रीमती बखला ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चे केवल उनके अपने परिवार की ज़िम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि एक सामाजिक ज़िम्मेदारी हैं । इस आयुर्वेद कार्यशाला के संयोजक शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा ने बताया कि आमपानी गांव को हर्बल ग्राम तथा शासकीय प्राथमिक विद्यालय को समस्त प्रकार के वनौषधियों का संकलन एवं अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने की संकल्पना की गई है।
अंतिम दिन गाँव के बीच हुआ सांस्कृतिक समापन,आयुर्वेद स्मृति चिन्ह से हुआ सम्मान
कार्यशाला के अंत में समस्त प्रशिक्षुओं को भारतीय ऋषि-परंपरा, स्थानीय जड़ी-बूटी संवर्धन, पर्यावरण संवर्धन, लोकोपचार तथा आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए आयुर्वेद स्मृति चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया | अतिथियों को बस्तर आर्ट तथा गाय और बछड़े की धातु प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। स्थानीय गाँव के विद्यालयीन बच्चों डिम्पल, टिकेश्वरी व कल्याणी समूह ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इस दौरान कार्यशाला में वैद्यराज दशरथ नेताम, वैद्यराज चिंताहरण साहू, वैद्यराज विक्रम मंडावी, गजानंद साहू, साध्वी भूमिका साहू, ग्राम सरपंच श्रीमती भारती मरकाम, सामाजिक कार्यकर्त्ता श्रीमती एकता कमलकांत साहू, ग्रामीण अध्यक्ष मदनमोहन साहू, ईश्वर साहू, पत्रकार दुलार साहू, शिक्षक उदय राम साहू, कृषक टीकाराम साहू, विष्णु प्रसाद नायक, आशीष साहू, मोहन रजक, प्यारी साहू, बृजराज साहू, भीषम साहू, कोदू राम साहू, बनवासा बाई, महेश्वर साहू, चन्दन साहू, अश्वनी कुमार साहू, दुष्यंत साहू, कीर्ति साहू, क्षमा साहू, पूर्वी, निहारिका, टोविशा आदि ने सहभागिता की। छ.ग.सहकार भारती के समस्त प्रकोष्ठ प्रमुख गिरधर मंडरिया, महामंत्री करूणानिधि यादव, संगठन मंत्री हेमन्त कुमार पाण्डेय, दुर्ग संभाग प्रमुख दीपक मिश्रा, सरगुजा संभाग प्रमुख वार्ष्णेय जायसवाल, दुर्ग से राकेश शुक्ला, कांति वर्मा, किरण मिश्रा, जया रेड्डी, प्रिया सिंह, पवन सिंह, श्री बागेश्वर धाम नागपुर विदर्भ सेवा समिति से योगेश जायसवाल, शाम राव सेंडे, नरेन्द्र यादव आदि ने इस पहल के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की।
