DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

सीसीआरटी दिल्ली में चयनित बालोद जिला की पुष्पा चौधरी ने किया छत्तीसगढ का प्रतिनिधित्व, छत्तीसगढ़ी सवांगा, बांस शिल्प कला का किया प्रदर्शन

देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिभागियों ने सराहा उनकी प्रतिभा को, कृषि उपकरणों की महत्ता से बताया क्यों कहते हैं छग को धान का कटोरा

बालोद। सीसीआरटी प्रशिक्षण दिल्ली में आयोजित किया गया । जिसका विषय था “विद्यालय शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश”। प्रशिक्षण में भारत से कुल 50 प्रतिभागी शामिल हुए। जिसमें कुल सात राज्यों से प्रतिभागी उपस्थित हुए ।छत्तीसगढ़ से कुल 15 प्रतिभागी भी शामिल हुए। जो की विभिन्न जिलों से आए हुए थे। बालोद जिला से तीन प्रतिभागी पुष्पा चौधरी , कैशरिन बैग,प्रतिभा त्रिपाठी भी शामिल हुई। प्रशिक्षण का विषय (विद्यालय शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश) के तहत प्रत्येक राज्य अपनी संस्कृति, परंपरा, धरोहर ,सभ्यता को शिक्षा के माध्यम से बच्चों को अपने कला संस्कृति से जोड़कर विकास करना है। विद्यालय में शामिल करते हुए बच्चों को उनकी संपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकते हैं।बालोद जिला से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मटिया(अ) विकासखंड. गुंडरदेही में पदस्थ


श्रीमती पुष्पा चौधरी भी शामिल हुई। जिन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुतीकरण में छत्तीसगढ़ सवांगा एवं बांस की कलाकृति का बेहतरीन अंदाज में प्रस्तुतीकरण किया। जिसने सभी का मन मोह लिया। पुष्पा द्वारा स्वयं छत्तीसगढ़ के सवांगा को धारण करते हुए अपने धरोहर के विषय में जानकारी प्रदान करने प्रयास किया गया एवं सवांगा के प्रत्येक भाग को बेहतरीन तरीके से बताया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के समस्त 15 प्रतिभागियों के द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया। सभी भारत से शामिल हुए प्रतिभागी ने उनके प्रतिभा की सराहना की। पुष्पा ने बताया कार्यक्रम में हम सभी ने छत्तीसगढ़ के व्यंजन, शिल्प कला , सभ्यता के विषय में जानकारी प्रदान किया । बांस से निर्मित कलाकृति बैलगाड़ी, हल, कोपर, बायसन की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी । जिनको छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम पाटन के निवासी श्रीराम पटेल के द्वारा निर्मित हस्तकला कृति थी। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इन्हीं कृषि उपकरणों के द्वारा खेती किया जाता है। जिसने भारत के पटल पर छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा के नाम से प्रसिद्धि दिलाई है। छत्तीसगढ़ के सभी 15 प्रतिभागियों द्वारा नृत्य की प्रस्तुतीकरण से माहौल को खुशनुमा बना दिया गया । सभी प्रस्तुतीकरण से झूमने लगे। विद्यालय शिक्षा में हम हस्तकला को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपने संस्कृति से जुड़े रहने एवं अपने पूर्वजों के धरोहर के रूप में प्राप्त संस्कृति कला शिल्प कला के प्रति आने वाली पीढ़ी को सम्मान एवं आत्मसात कर सके ऐसा इस प्रशिक्षण का उद्देश्य था। शिल्प को हमारे बच्चों को स्कूलों में कलाओं को विकसित रूप में प्रदान करने के लिए हमारा प्रयास रहेगा ।हस्तकला कौशल को हम अपने विद्यालय में पढ़ाई में उपयोग कर बच्चों को सीख सकते हैं।

पुष्पा चौधरी ने किया राज्य टीम का नेतृत्व

बालोद जिला से तीन प्रतिभागी भाग लिए थे। जिसमें पुष्पा चौधरी, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मटिया में पदस्थ है, जिनको छत्तीसगढ़ राज्य प्रतिनिधित्व करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गई थी।उन्होंने जानकारी दी कि कला मेरा मुख्य विषय रहा है और सौभाग्य से मैं इस विषय पर मुझे दिल्ली सीसीआरटी में प्रशिक्षण हेतु चयन किया गया और मुझे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। यह मेरा परम सौभाग्य था। प्रशिक्षण में बीड्स वर्क,वर्ली आर्ट,बुक बाइंडिंग ,मिट्टी के खिलौने बनाना और वॉल डेकोरेशन कुल पांच विषय पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सभी को हमने अच्छे से सीखा। प्रतिदिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ,बंगाल कर्नाटक, बिहार ,गुजरात हरियाणा ,राजस्थान की प्रस्तुतीकरण प्रतिदिन प्रति प्रदेश के प्रतिभागी शामिल होकर प्रस्तुतीकरण देते थे। साथ-साथ प्रथम प्रहर में हमें विभिन्न विधाओं में पारंगत विषय शिक्षक विशेषज्ञों से रूबरू होने का भी मौका मिला एवं उनसे बातचीत करने अपने विचारों को साझा करने का भी मौका मिला।इसी क्रम में महान संगीतकार सुभाष बहुगुण जिन्होंने हमें तेलुगू ,कश्मीरी बंगाली ,हिंदी , वंदे मातरम् गीत को गाकर सिखाया। हमने अच्छे से सीखा ,जिसे स्कूल में सिखाया जा सकता है। इस क्रम में महान थिएटर कलाकार विनोद नारायण इंदौरकर से भी मुलाकात करवाया गया। जिन्होंने थिएटर पर अभिनय के माध्यम से विषयवस्तु को भावों , अभिनय के द्वारा समझाया जा सकता हैं।
यह भी बच्चों को शाला में सिखाया जा सकता है। अपनी भावनाओं को हम प्रदर्शित करने के लिए अभिनय के माध्यम से समझा सकते हैं । जितेंद्र बेल कालरा के द्वारा राजभाषा नीति पर विशेष जानकारी व राजभाषा के भाग , अध्याय, अधिनियम की जानकारी प्रदान की गई । डिप्टी डायरेक्टर संदीप शर्मा,
आशुतोष अवस्थी ने भी बहुत अच्छी जानकारी प्रदान की।
प्रतिदिन के कार्यशाला में देवनारायण रजक एवं कोमल के द्वारा दिशा निर्देश दिया जाता था। प्रशिक्षण के दौरान भ्रमण के लिए दिल्ली के कुतुब मीनार व अंतराष्ट्रीय क्राफ्ट म्यूजियम का भ्रमण कराया गया। राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय में हम सभी प्रतिभागी ने विभिन्न प्रदेशों के प्राचीनतम एवं अद्भुत हस्तकलाओ को करीब से देखने की सुखद अनुभूति हुई। भारत के अद्भुत संस्कृति सभ्यता को जानने का समझने का मौका मिला।

कला भावनाओं का दर्पण है

पुष्पा चौधरी ने सीसीआरटी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा
सीसीआरटी एक ऐसा मंच है जहां कलाकार अपनी कला को और बेहतर तरीके से विकसित कर सकता है।कार्यशाला में
सभी प्रतिभागियों के बनाए गए कलाकृति एवं पाठ योजना की प्रदर्शनी लगाई गई। जिनका निरीक्षण देवनारायण रजक,
संदीप शर्मा, डॉक्टर विनोद नारायण इंदुरकर ने किया एवं विभिन्न राज्यों से एक-एक प्रतिभागी को अपने राज्य की प्रतिनिधित्व करने एवं बात रखने का मौका दिया गया। जिसमें पुष्पा चौधरी को छत्तीसगढ़ ग्रुप से चयन किया गया। इस चयन पर पुष्पा चौधरी कहती हैं कि मेरा स्कूली जीवन से ही चित्रकारी, हस्तकला में रुचि रही। अब मैं कक्षा में भी वर्ली आर्ट, क्राफ्ट आर्ट, मिट्टी की मूर्ति कलाकृति सिखाती हूं। हम सीसीआरटी से जो उद्देश्य लेकर आए हैं अपने शालाओं में बच्चों को विरासत से प्राप्त कला ,संस्कृति सभ्यता ,को सीखाने का प्रयास करेंगे एवं आने वाली पीढ़ी को हस्तकला कौशल के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। अंतिम दिवस में सात प्रदेशों से शामिल हुए सभी प्रतिभागियों को सीसीआरटी के अध्यक्ष श्री इंदुरकर के द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया और 10 दिवसीय प्रशिक्षण की समाप्ति की घोषणा राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

You cannot copy content of this page